सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड के केदली पुनर्वास वार्ड संख्या-11 में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। पूरे इलाके में जलभराव हो गया है और बाढ़ का पानी घरों में घुस जाने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का अपने ही घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
खाने-पीने से लेकर मवेशियों तक की चिंता
घरों में पानी भर जाने के कारण लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती बन गई है। खाना बनाना, पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था करना और मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करना बेहद कठिन हो गया है। कई परिवार अपने जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों और ऊंचे बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
बाढ़ का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है। लगातार जलभराव के कारण आवागमन बाधित हो गया है और लोगों को आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बीमारियों का खतरा बढ़ा, ग्रामीणों ने मांगी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार जमा हुआ है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत सामग्री, नावों की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थायी समाधान की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ की वजह से उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि हर साल आने वाली इस त्रासदी से राहत मिल सके।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजर
बाढ़ प्रभावित परिवार अब प्रशासन की राहत और बचाव कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय पर राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि संकट की इस घड़ी में उन्हें जल्द राहत मिल सके।