पलामू, 9 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पलामू टाइगर रिजर्व में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मनिका विधायक श्री रामचंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड की जनजातीय संस्कृति एवं विरासत को प्रदर्शित करने वाले पारंपरिक लोक नृत्य से हुई। इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक श्री प्रजेश जेन ने प्रस्तुति के माध्यम से ‘जन-वन भागीदारी’ की अवधारणा के तहत जनजातीय विकास एवं आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
‘हुनर से रोजगार’ से 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण
कार्यक्रम में ‘हुनर से रोजगार’ उन्नत कौशल विकास कार्यक्रम की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस पहल के तहत अब तक 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को नेचुरलिस्ट, कंप्यूटर, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई सहित विभिन्न रोजगारपरक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उनके क्षेत्र में ही कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना तथा रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करना है।
‘मिशन अविरल धारा’ से जल संरक्षण के साथ ग्रीन जॉब्स पर जोर
कार्यक्रम में ‘मिशन अविरल धारा’ की भी जानकारी दी गई। इसके तहत वैज्ञानिक रिज-टू-वैली (Ridge to Valley) दृष्टिकोण अपनाकर स्थानीय नदियों और जलधाराओं के पुनर्जीवन की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
यह पहल जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार (Green Jobs) के अवसर पैदा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘महुआ मित्र’ से स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने का प्रयास
स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक अवसरों से जोड़ने के लिए ‘महुआ मित्र’ पहल के माध्यम से खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रहण और बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
वहीं ‘ऑपरेशन ब्लैक गोल्ड’ के तहत वन क्षेत्र से प्राप्त पत्ती-कचरे को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक कम्पोस्ट में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे वन प्रबंधन की चुनौती को स्थानीय आजीविका और आर्थिक अवसर में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
वन आधारित उत्पादों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया आधार
पलामू के स्थानीय और वन आधारित उत्पादों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में ‘हेनार हनी’, ‘कोयल कोल्ड प्रेस्ड मस्टर्ड ऑयल’, ‘जूही धूप’ और ‘वनम हैंडमेड हर्बल सोप’ जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन पहलों में स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कौशल का समन्वय किया जा रहा है। इससे समुदायों के लिए प्रकृति आधारित टिकाऊ रोजगार के अवसर विकसित करने के साथ युवाओं के पलायन को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
इको-टूरिज्म में जनजातीय युवाओं की बढ़ेगी भागीदारी
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रोफेशनल इको-गाइड कोर्स पूरा करने वाले जनजातीय युवाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षण प्राप्त युवा अब पलामू टाइगर रिजर्व के इको-टूरिज्म क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पलामू का इको-टूरिज्म क्षेत्र नेतरहाट से बेटला और मंडल तक विस्तृत है। इसमें लोध जलप्रपात, सुग्गा जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थलों के साथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर पलामू किला भी शामिल है।
प्रशिक्षित स्थानीय युवा पर्यटकों को क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत से परिचित कराने के साथ संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगे।
प्रकृति संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनजातीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के बिना प्रकृति संरक्षण को स्थायी रूप से सफल बनाना संभव नहीं है।
स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, कौशल, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को रोजगार एवं आर्थिक अवसरों से जोड़कर पलामू में प्रकृति संरक्षण के साथ समावेशी और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।