अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन इन दिनों अपने शो 'शेखर टुनाइट' को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे दर्दनाक अध्याय को याद करते हुए बेटे आयुष सुमन की बीमारी और निधन को लेकर भावुक खुलासे किए हैं। शेखर ने बताया कि बेटे को खोने का दर्द आज भी उनके दिल में जिंदा है और वह कभी उस सदमे से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए।
दादा ने सबसे पहले पहचाने थे बीमारी के संकेत
एक इंटरव्यू में शेखर सुमन ने बताया कि उनके पिता पेशे से डॉक्टर थे और सबसे पहले उन्होंने ही आयुष की बीमारी के शुरुआती संकेत पहचाने थे। शेखर ने कहा, "आयुष मेरे पिता की गोद में बैठा था। उसे देखते हुए उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि इसका लिवर थोड़ा बढ़ा हुआ लग रहा है। मुंबई लौटकर इसकी जांच जरूर करवा लेना। हो सकता है कुछ न हो, लेकिन इसे नजरअंदाज मत करना।"
जांच में सामने आई दुर्लभ और लाइलाज बीमारी
मुंबई लौटने के बाद जब आयुष की जांच करवाई गई, तो डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ हृदय रोग का पता लगाया। आयुष एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोएलास्टोसिस (Endomyocardial Fibroelastosis) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था।शेखर ने बताया कि कई मेडिकल टेस्ट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह बीमारी बेहद दुर्लभ और लगभग लाइलाज थी। जब उन्होंने अपने पिता को फोन पर इसकी जानकारी दी, तो कुछ देर तक सन्नाटा छाया रहा और फिर उनके पिता के मुंह से सिर्फ इतना निकला, "हे भगवान!"
11 साल की उम्र में दुनिया को कह दिया अलविदा
आयुष सुमन का साल 1995 में मात्र 11 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। बेटे की मौत ने शेखर सुमन और उनके परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया था। शेखर ने कहा, "मैंने इस बारे में कई बार बात की है, लेकिन कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को खोने के दर्द से कभी उबर नहीं सकते। हम आज भी हर दिन उसकी तस्वीरें देखते हैं, उसके बारे में बातें करते हैं और उसे याद करते हैं।"
काशी विश्वनाथ मंदिर में मिला था एक अनोखा संकेत
शेखर सुमन ने एक ऐसी घटना का भी जिक्र किया, जिसने उनके परिवार को यह विश्वास दिलाया कि आयुष आज भी किसी न किसी रूप में उनके साथ है। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी पत्नी अल्का सुमन काशी विश्वनाथ मंदिर गई थीं। मंदिर से बाहर निकलने के बाद एक व्यक्ति ने उनसे पैसे मांगे। अल्का ने उसे कुछ पैसे दिए तो उसने बिल्कुल आयुष की आवाज और अंदाज में कहा, "इतने से मेरा क्या होगा?" शेखर के मुताबिक, यही वाक्य आयुष अक्सर घर में कहा करता था, जब बीमारी के कारण उसे सीमित मात्रा में खाना दिया जाता था।
'वह आज भी हमारे आसपास है'
शेखर सुमन का कहना है कि उन्हें आज भी बेटे की मौजूदगी का एहसास होता है। उन्होंने बताया कि कई पुजारियों और ज्योतिषियों ने भी कहा था कि आयुष एक दिन किसी संकेत के जरिए परिवार को अपनी मौजूदगी का एहसास कराएगा।अभिनेता ने कहा, "हमें लगता है कि आयुष आज भी हमारे साथ है। भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी मौजूदगी हमेशा महसूस होती है। कई लोगों ने यह भी कहा है कि वह किसी न किसी रूप में परिवार में वापस आएगा।"
आज भी जिंदा हैं बेटे की यादें
शेखर सुमन और उनका परिवार आज भी आयुष की यादों को संजोए हुए है। अभिनेता का कहना है कि वक्त जरूर बीत जाता है, लेकिन संतान को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं होता। उनके लिए आयुष सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि आज भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।