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'मेरा शरीर, मेरी मर्जी... तो उसकी आंखें, उसकी मर्जी?' सिंगर सुनीता उपद्रष्टा के बयान पर बवाल

प्रकाशित: 26-06-2026, 06:24 AM
'मेरा शरीर, मेरी मर्जी... तो उसकी आंखें, उसकी मर्जी?' सिंगर सुनीता उपद्रष्टा के बयान पर बवाल
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तेलुगू सिंगर सुनीता उपद्रष्टा अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। फेमिनिज्म और महिलाओं की आजादी पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। उनके बयान की कई लोगों ने आलोचना की, जबकि सिंगर चिन्मयी श्रीपदा ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

फेमिनिज्म पर क्या बोलीं सुनीता?

एक इंटरव्यू के दौरान सुनीता उपद्रष्टा से महिलाओं की बराबरी और फेमिनिज्म को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि कुछ महिलाएं सिगरेट पीने या अपनी पसंद के कपड़े पहनने को आजादी और बराबरी का प्रतीक मानती हैं, जबकि उनके अनुसार यह असली फेमिनिज्म नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर कोई महिला सोचती है कि अपनी मर्जी के कपड़े पहनना ही आजादी है, तो यह फेमिनिज्म नहीं है। असली बराबरी तब होगी जब मेरी राय को भी पुरुष की राय जितनी अहमियत मिले और मेरे साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।"

'मेरा शरीर, मेरी मर्जी... तो उसकी आंखें, उसकी मर्जी'

जब इंटरव्यू में उनसे 'मेरा शरीर, मेरा अधिकार' जैसे फेमिनिस्ट स्लोगन पर सवाल किया गया, तो सुनीता ने कहा, "अगर यह मेरा शरीर और मेरी मर्जी है, तो उसकी आंखें भी उसकी हैं और उसकी भी अपनी मर्जी है।" उन्होंने आगे कहा कि लोग जो चाहें पहनें, लेकिन अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखें। उनके मुताबिक, "दूसरों की सोच बदलने से आसान है खुद को सुरक्षित रखना। अगर लोग मुझे पुराने ख्यालों का कहते हैं, तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।"

सोशल मीडिया पर हुई तीखी आलोचना

सुनीता का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने उनके बयान को 'विक्टिम ब्लेमिंग' और महिलाओं के प्रति असंवेदनशील बताया। एक यूजर ने लिखा, "यह मान लेना गलत है कि खूबसूरत चेहरा और अच्छी आवाज होने का मतलब समझदारी भी होगी।" वहीं दूसरे यूजर ने सवाल उठाया, "अगर कोई महिला पूरी तरह सादे कपड़े पहने, तो क्या उसकी सुरक्षा की गारंटी है? उत्पीड़न कपड़ों से नहीं, मानसिकता से जुड़ा मुद्दा है।"

चिन्मयी श्रीपदा ने भी जताई असहमति

सिंगर चिन्मयी श्रीपदा ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "मैं सुनीता गारू का सम्मान करती हूं और एक कलाकार के तौर पर उन्हें पसंद भी करती हूं। लेकिन पूरे सम्मान के साथ कहना चाहूंगी कि जब महिलाएं इस तरह पुरुषों के पक्ष में तर्क देती हैं, तो इसका असर महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर पड़ता है। इससे उनके लिए माहौल और असुरक्षित हो सकता है।" सुनीता उपद्रष्टा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर फेमिनिज्म, महिलाओं की सुरक्षा और व्यक्तिगत आजादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल उनके बयान पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला लगातार जारी है।

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