अगर आपको किसी मोबाइल कंपनी के नाम से फोन कॉल, WhatsApp मैसेज, ईमेल या लेटर मिलता है, जिसमें आपकी छत या जमीन पर मोबाइल टावर लगाने के बदले हर महीने मोटे किराए का वादा किया जाता है, तो सावधान हो जाइए। इन दिनों Fake Mobile Tower NOC Scam तेजी से फैल रहा है। साइबर ठग खुद को टेलीकॉम कंपनी या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
ऐसे दिया जाता है ठगी को अंजाम
ठग दावा करते हैं कि आपकी जमीन या मकान की छत मोबाइल टावर लगाने के लिए चुनी गई है। इसके बदले हर महीने 20 हजार से 1 लाख रुपये तक किराया मिलने का लालच दिया जाता है। भरोसा जीतने के लिए वे फर्जी एग्रीमेंट, नकली सरकारी लेटर, टेलीकॉम कंपनी के नाम वाले दस्तावेज और कथित NOC भी भेज देते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉजिट, GST, स्टांप ड्यूटी या NOC फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। जैसे ही पीड़ित भुगतान करता है, ठग संपर्क खत्म कर देते हैं।
फर्जी NOC बन रहा है सबसे बड़ा हथियार
इस स्कैम में नकली No Objection Certificate (NOC) का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जा रहा है। इन दस्तावेजों पर सरकारी लोगो, मुहर और अधिकारियों के नकली हस्ताक्षर तक लगाए जाते हैं, जिससे वे बिल्कुल असली दिखाई देते हैं। कई लोग इन्हें असली मानकर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं और बाद में ठगी का शिकार हो जाते हैं।
दूरसंचार विभाग ने क्या कहा?
दूरसंचार विभाग (DoT) ने साफ किया है कि मोबाइल टावर लगाने के लिए वह किसी व्यक्ति से कोई फीस नहीं लेता और न ही इस तरह का कोई NOC जारी करता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति या संस्था टावर लगाने के नाम पर पहले पैसे मांग रही है, तो यह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
इन संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें
यदि कोई व्यक्ति या कंपनी—
- टावर लगाने से पहले पैसे जमा कराने को कहे,
- हर महीने असामान्य रूप से अधिक किराए का लालच दे,
- निजी बैंक खाते में भुगतान करने को कहे,
- जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाए,
- संदिग्ध ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर या गलत भाषा वाले दस्तावेज भेजे,
तो बेहद सतर्क रहें। किसी भी स्थिति में प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसे न भेजें। साथ ही अपना आधार, PAN, बैंक डिटेल्स या OTP किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत
यदि आप इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा Cyber Crime Portal पर ऑनलाइन शिकायत करें और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी रिपोर्ट दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।