उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी विद्यालयों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित कर मॉडल विद्यालय बनाने का दावा कर रही है। इसके लिए कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें आधुनिक स्वरूप देने का अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि, बलिया के गड़वार ब्लॉक स्थित बिसुकिया कंपोजिट विद्यालय की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है।
जर्जर छत से टपकता है बारिश का पानी
बिसुकिया कंपोजिट विद्यालय की स्थिति बेहद दयनीय बताई जा रही है। विद्यालय की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता रहता है। ऐसे में बच्चों और शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
विद्यालय में कायाकल्प योजना के तहत अपेक्षित सुविधाएं नहीं दिखाई देतीं। परिसर में टाइल्स नहीं लगी हैं और शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। बच्चों के लिए पीने के पानी की सुविधा न होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शौचालय और बिजली व्यवस्था भी बदहाल
विद्यालय के शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। शौचालय के ऊपर पानी की टंकी तो लगी है, लेकिन उसमें पानी की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा विद्यालय में बिजली और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से भीषण गर्मी में बच्चों को कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं भी नदारद
सरकार जहां सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास की बात करती है, वहीं इस विद्यालय में स्मार्ट क्लास की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इससे छात्रों की आधुनिक शिक्षा तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है।
जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में अंतर
विद्यालय की मौजूदा स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर को दिखाती है। अब सवाल यह है कि कायाकल्प योजना के तहत इस विद्यालय में कब तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।