बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा का परिणाम घोषित हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। इस बार बाढ़ अनुमंडल के कई अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। किसी ने दूसरे प्रयास में, किसी ने तीसरे प्रयास में सफलता पाई, तो किसी ने वर्षों के संघर्ष के बाद अपनी मंजिल हासिल की। इन्हीं सफल अभ्यर्थियों में टाल क्षेत्र के सुदूरवर्ती नारायणपुर गांव के रहने वाले चंदन कुमार भी शामिल हैं, जिन्होंने पांचवें प्रयास में बीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
सीमित संसाधनों के बीच तय किया सफलता का सफर
बाढ़ अनुमंडल मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर नदी के कछार पर स्थित कुर्मी चक पंचायत के नारायणपुर गांव में शिक्षा की सुविधाएं सीमित हैं। गांव में केवल प्राथमिक और मध्य विद्यालय उपलब्ध हैं। हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को लगभग तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जबकि स्नातक और उच्च शिक्षा के लिए बाढ़ या पटना का रुख करना पड़ता है।
इन्हीं चुनौतियों के बीच माता लखी देवी के पुत्र चंदन कुमार ने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पांचवें प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
सफलता की खबर से गांव में खुशी की लहर
चंदन कुमार की सफलता की सूचना मिलते ही नारायणपुर गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे और मिठाई खिलाकर उन्हें बधाई दी। गांव के लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया सम्मानित
चंदन कुमार के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में कुर्मी चक पंचायत के मुखिया बादल महतो, समियागढ़ थाना प्रभारी सौरभ कुमार, चंदन के मामा सतीश महतो, परिजन, मित्र और कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने उन्हें अंगवस्त्र, फूल-माला और शुभकामनाएं देकर सम्मानित किया। ग्रामीणों और बुजुर्गों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि गांव के बच्चों के लिए नई प्रेरणा बनेगी।
दो रोटी कम खाइए, लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाइए'
इस अवसर पर मुखिया बादल महतो ने अभिभावकों से शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "दो रोटी कम खाइए, लेकिन अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा अवश्य दिलाइए। शिक्षा ही वह ताकत है, जो गांव और समाज की तस्वीर बदल सकती है।" उनकी इस अपील का उपस्थित लोगों ने जोरदार समर्थन किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने चंदन कुमार
ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि चंदन कुमार आगे भी गांव और आसपास के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे तथा उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में अंतिम बाधा नहीं बनती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और हौसला मजबूत हो, तो मंजिल जरूर मिलती है। आज चंदन कुमार की कहानी पूरे टाल क्षेत्र के युवाओं के लिए संघर्ष, धैर्य, आत्मविश्वास और सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।