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बांकीपुर उपचुनाव बना बिहार की राजनीति का केंद्र, बीजेपी और जनसुराज के बीच प्रतिष्ठा की जंग

प्रकाशित: 06-07-2026, 08:02 AM
बांकीपुर उपचुनाव बना बिहार की राजनीति का केंद्र, बीजेपी और जनसुराज के बीच प्रतिष्ठा की जंग
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बिहार की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस सीट पर सबसे ज्यादा नजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनसुराज के बीच होने वाले मुकाबले पर टिकी हुई है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से बदले चुनावी समीकरण

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा बांकीपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद इस उपचुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि इसे प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता और बीजेपी के शहरी जनाधार की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। जनसुराज के लिए यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिलने के बाद पार्टी इस उपचुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

चार दशक से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है बांकीपुर

बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले चार दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर बीजेपी का लगातार प्रभाव रहा है। हाल ही में नितिन नवीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके इस्तीफे से यह सीट रिक्त हुई, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। ऐसे में बीजेपी किसी भी कीमत पर इस प्रतिष्ठित सीट को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी।

जातीय और सामाजिक समीकरण निभाएंगे अहम भूमिका

पटना शहर की प्रमुख विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण काफी विविध है। यहां कायस्थ समुदाय का प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा वैश्य, भूमिहार, ब्राह्मण, यादव, कुर्मी, राजपूत और मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति में इन सामाजिक समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

बीजेपी और जनसुराज के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

जहां एक ओर बीजेपी के लिए यह सीट अपने पारंपरिक गढ़ को बचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर जनसुराज के लिए यह अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है। विपक्षी दल भी इस चुनाव को बेहद अहम मान रहे हैं और पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

6 अगस्त को होगा फैसला

बांकीपुर उपचुनाव को बिहार की राजनीति का 'लिटमस टेस्ट' माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी दल पूरी ताकत झोंकेंगे, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता करेंगे। अब सबकी नजर 6 अगस्त को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि बांकीपुर की इस प्रतिष्ठित सीट पर जीत का परचम कौन लहराता है।

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