उत्तर प्रदेश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों के बढ़ते दाम तथा बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) के विरोध में सोमवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक मांग-पत्र सौंपकर जनहित में हस्तक्षेप की मांग की।
व्यापारियों ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकार से महंगाई पर नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभाव से कदम उठाने की मांग की। संगठन ने पांच प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि:
- उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज को तत्काल वापस लिया जाए।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की जाए, ताकि परिवहन लागत घट सके।
- वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों के दाम कम किए जाएं।
- घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर दोबारा पर्याप्त सब्सिडी बहाल की जाए।
- परिवहन लागत कम कर बाजार में सब्जियों, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित किया जाए।
'सबसे ज्यादा मार छोटे व्यापारियों पर'
संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारियों और निम्न आय वर्ग पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार ने छोटे उद्योगों, दुकानदारों और कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो व्यापार प्रभावित होगा और बेरोजगारी की समस्या बढ़ सकती है।
थोक कारोबारियों ने भी जताई चिंता
प्रदर्शन में शामिल सब्जी और राशन के थोक कारोबारियों ने कहा कि डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ता है। इससे खेतों से मंडियों तक सामान पहुंचाने की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। व्यापारियों का कहना है कि महंगी बिजली और कमर्शियल गैस सिलेंडर के कारण उनका मुनाफा लगातार घट रहा है, जबकि ग्राहक भी बढ़ती महंगाई के कारण खरीदारी में कटौती कर रहे हैं।
'यह केवल व्यापारियों का नहीं, जनहित का मुद्दा'
व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन में कहा कि यह केवल व्यापारियों की समस्या नहीं, बल्कि आम जनता से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है। संगठन ने राष्ट्रपति से अपील की कि वह इस मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दें।
आंदोलन की चेतावनी
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का व्यापारी वर्ग शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और अतिरिक्त आर्थिक बोझ के बीच छोटे कारोबारियों के लिए व्यापार चलाना लगातार कठिन होता जा रहा है।