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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर गरमाई सियासत, सपा नेता पवन पांडे ने भाजपा और ट्रस्ट पर साधा निशाना

प्रकाशित: 07-07-2026, 01:08 PM
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर गरमाई सियासत, सपा नेता पवन पांडे ने भाजपा और ट्रस्ट पर साधा निशाना
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राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री पवन पांडे ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पहले से ही ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं और चढ़ावे में गड़बड़ी की बात उठा रहे थे और अब सामने आए घटनाक्रम से उनके आरोप सही साबित हुए हैं।

पवन पांडे ने दावा किया कि मामले में कार्रवाई के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को जिम्मेदारियों से हटाया गया। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि चढ़ावे और मंदिर कोष में कथित गड़बड़ियां हुई हैं।

भाजपा और आरएसएस पर लगाया निशाना

सपा नेता ने आरोप लगाया कि जब अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया तो भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार इस मामले को उठाता रहा और अब कथित अनियमितताओं के सामने आने से भाजपा असहज है।

निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई की मांग

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए दावों को लेकर भी समाजवादी पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। सपा नेता तेज नारायण पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद ने भ्रामक जानकारी साझा कर पार्टी और उसके PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक गठबंधन की छवि खराब करने का प्रयास किया है।

उन्होंने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निशिकांत दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की।

"सबूत दें या माफी मांगें"

तेज नारायण पांडेय ने कहा कि यदि निशिकांत दुबे अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण नहीं दे सकते, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी इस मामले में भाजपा सांसद को मानहानि का कानूनी नोटिस भी भेज चुकी है।

गोविंद देव गिरी से भी इस्तीफे की मांग

सपा नेता पवन पांडे ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट के कोष में कथित गड़बड़ियां हुई हैं, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कोषाध्यक्ष को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोषाध्यक्ष के कार्यकाल में ही कथित वित्तीय अनियमितताएं हुईं, तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज

राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। एक ओर विपक्ष निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा इस मामले में लगाए जा रहे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है।

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