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रायबरेली में नर्सिंग होम की हकीकत पर सवाल, छोटे अस्पतालों में बड़े ऑपरेशन का दावा

प्रकाशित: 08-07-2026, 05:38 AM
रायबरेली में नर्सिंग होम की हकीकत पर सवाल, छोटे अस्पतालों में बड़े ऑपरेशन का दावा
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सरकार जहां डिजिटल हेल्थ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं रायबरेली में कई निजी नर्सिंग होम और छोटे अस्पतालों की कार्यप्रणाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है। महाराजगंज, चंदापुर रोड और बछरावां रोड समेत जिले के कई इलाकों में 4 से 6 बेड वाले अस्पताल बड़े ऑपरेशन और डिलीवरी कराने का दावा कर रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर महुआ टीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में कई खामियां सामने आई हैं।

4 से 6 बेड वाले अस्पतालों में ऑपरेशन और डिलीवरी

रिपोर्ट के मुताबिक, उजाला हॉस्पिटल, प्रतिज्ञा हॉस्पिटल, जनता हॉस्पिटल, आशी हॉस्पिटल और अन्य छोटे निजी अस्पताल सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े ऑपरेशन और प्रसव करा रहे हैं। आरोप है कि कई जगहों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं है और गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को लखनऊ या रायबरेली के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

नियमों के पालन पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई अस्पतालों के पास आवश्यक पंजीकरण, फायर एनओसी और अन्य अनिवार्य मानकों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या ये अस्पताल निर्धारित सरकारी मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं। फिलहाल इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

बच्ची की मौत के बाद भी नहीं थमा विवाद

हाल ही में एक निजी नर्सिंग होम में टॉन्सिल ऑपरेशन के दौरान 10 वर्षीय बच्ची की तबीयत बिगड़ने और बाद में इलाज के दौरान मौत का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद संबंधित नर्सिंग होम पर कार्रवाई हुई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक अस्पताल पर कार्रवाई के बाद भी कई नए अस्पताल बिना पर्याप्त सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले में संचालित पंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक और अस्पतालों की संख्या तथा उनकी वैधता को लेकर स्वास्थ्य विभाग पारदर्शी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहा है। लोगों का आरोप है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।

सरकारी मानकों और व्यवस्था पर बहस

सरकारी नियमों के अनुसार नर्सिंग होम के संचालन के लिए न्यूनतम बेड क्षमता, 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं आवश्यक हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सीमित संसाधनों वाले अस्पतालों में गंभीर उपचार और ऑपरेशन किस आधार पर किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले को लेकर लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि शिकायतों और सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाती है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि जिले में संचालित निजी अस्पताल और नर्सिंग होम निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

 
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