एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर संदीपा विर्क एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि एक हालिया इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की। संदीपा ने बताया कि कथित 6 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें करीब साढ़े चार महीने तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि जेल में बिताया गया समय मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था।
'हर दिन मौत की दुआ मांगती थी'
TheSheroesTV को दिए इंटरव्यू में संदीपा ने कहा कि तिहाड़ जेल में बिताया गया हर दिन उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था। उन्होंने बताया कि वहां का हर पल बेहद भारी लगता था और वह रोज यही सोचती थीं कि यह दौर कब खत्म होगा। संदीपा के मुताबिक, जेल की जिंदगी को बाहर से समझ पाना आसान नहीं है और आज भी उन दिनों को याद कर वह भावुक हो जाती हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी गिरफ्तारी
संदीपा विर्क का नाम करीब 6 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। वह लगभग साढ़े चार महीने तक तिहाड़ जेल में रहीं। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं और अपनी निजी एवं पेशेवर जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं। मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
कास्टिंग काउच पर भी रखी बेबाक राय
इंटरव्यू के दौरान संदीपा ने मनोरंजन जगत में कास्टिंग काउच के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में कई बार ऐसे हालात का सामना करना पड़ा, जहां काम के बदले समझौते का दबाव बनाया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए फैसला पूरी तरह उसका अपना होता है।
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अनुभव किए साझा
संदीपा ने दावा किया कि एक पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान सात दिन तक काम करने के बाद फिल्म के निर्देशक ने उनसे निजी समझौते की मांग की। उनके अनुसार, जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया तो उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। उन्होंने एक अन्य घटना का भी जिक्र किया, जिसमें उनके अनुसार एक फिल्म के अभिनेता ने शर्त रखी कि वह उसी होटल में उसके बगल वाले कमरे में ठहरें, तभी शूटिंग होगी। संदीपा ने कहा कि उन्होंने ऐसी शर्त स्वीकार नहीं की और इस तरह के अनुभव किसी भी कलाकार को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
'सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है यह समस्या'
संदीपा विर्क का कहना है कि कास्टिंग काउच जैसी घटनाओं को केवल फिल्म इंडस्ट्री से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में भी इस तरह के दबाव देखने को मिलते हैं, हालांकि हर जगह उनका तरीका अलग हो सकता है।
'टैलेंट के आधार पर मिलना चाहिए काम'
संदीपा ने कहा कि वह कास्टिंग काउच संस्कृति के पूरी तरह खिलाफ हैं। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार को उसके हुनर और मेहनत के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। काम के बदले किसी भी तरह की निजी मांग करना गलत है और ऐसे व्यवहार को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।