पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के बाढ़ और पंडारक प्रखंड में संचालित कई निजी विद्यालय खुद को सीबीएसई पद्धति पर आधारित बताकर अभिभावकों को आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि, जमीनी पड़ताल में विद्यालयों के दावों और वास्तविक सुविधाओं के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां
निरीक्षण के दौरान बाढ़ प्रखंड के भेटगांव स्थित आवासीय आदर्श विद्या मंदिर और पंडारक प्रखंड के किड्स प्ले स्कूल का जायजा लिया गया। इस दौरान विद्यालयों में पुस्तकालय, खेल मैदान, कंप्यूटर शिक्षा और अन्य बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर कई सवाल सामने आए।
प्रबंधन ने कहा- 'व्यवस्था की जा रही है'
जब विद्यालय प्रबंधन से इन सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई तो अधिकांश मामलों में जवाब मिला कि आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं या जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी। हालांकि निरीक्षण के दौरान कई सुविधाएं मौके पर मौजूद नहीं मिलीं।
छोटे कमरों में पढ़ रहे बड़ी संख्या में बच्चे
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि लगभग 10×10 फीट के कक्ष में 30 तक बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही थी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने छोटे कमरे में अधिक बच्चों के बैठने से पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समुचित विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अभिभावकों ने बेहतर सुविधाओं की उठाई मांग
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि वे निजी विद्यालयों में बच्चों का दाखिला बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद से कराते हैं। उनका कहना है कि यदि विद्यालय सीबीएसई स्तर की शिक्षा देने का दावा करते हैं, तो उन्हें उसी अनुरूप आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए।
शिक्षा विभाग से नियमित जांच की मांग
इस पूरे मामले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित विद्यालय वास्तव में उन मानकों का पालन कर रहे हैं, जिनका वे दावा करते हैं। स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से ऐसे विद्यालयों की नियमित जांच कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।