पटना जिले के मसौढ़ी स्थित तारेगना रेलवे स्टेशन परिसर में मगही कला उत्थान परिषद द्वारा 'मगही चौपाल' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने, जनगणना में मातृभाषा के रूप में 'मगही' दर्ज कराने और सरकारी नौकरियों में भाषा को उचित स्थान दिलाने की मांग को मजबूत करना था।
परिचर्चा, गीत और कविताओं से सजी चौपाल
कार्यक्रम में मगही भाषा और संस्कृति पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। इसके साथ ही मगही गीत, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को भाषा के महत्व से अवगत कराया गया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का खूब मनोरंजन किया।
मगध की पहचान है मगही भाषा
परिचर्चा में पटना, जहानाबाद, अरवल और गया से आए वक्ताओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मगही, मगध क्षेत्र की मातृभाषा होने के बावजूद आज तक उसे सरकारी मान्यता नहीं मिल सकी है। वक्ताओं ने कहा कि बड़ी आबादी द्वारा बोली जाने के बावजूद मगही भाषा अब भी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं हो सकी है।
जनगणना में 'मगही' लिखाने की अपील
मगही शोधकर्ता एवं मगही चौपाल, जहानाबाद के प्रतिनिधि शनि कुमार कश्यप ने लोगों से आगामी जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में 'मगही' दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने उपस्थित लोगों को इसके लिए संकल्प भी दिलाया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां
कार्यक्रम में गायिका काजल कुमारी ने मगही लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, परिचर्चा में पटना प्रयास नाटक मंच के मिथिलेश सिंह, हेमांशु शेखर, जहानाबाद के विश्वजीत अकेला, सुधाकर राजेंद्र, गौतम पराशर तथा अरवल के नंद किशोर विद्यार्थी ने भी अपने विचार रखे।
अतिथियों का किया गया सम्मान
इस अवसर पर जीआरपी थाना प्रभारी सोनू कुमार ने सभी आगंतुकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संयोजन गौतम कुमार ने किया, जबकि संचालन धर्मेंद्र कुमार और अध्यक्षता नवल भारती ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, प्रोफेसर, शिक्षक, पत्रकार और समाजसेवी उपस्थित रहे।