बाढ़ स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट के ऐतिहासिक उमानाथ घाट के सौंदर्यीकरण के तहत नई सीढ़ी घाट के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। हालांकि, मानसून की दस्तक और गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने इस परियोजना की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा, जिससे कार्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
बढ़ता जलस्तर बना सबसे बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में घाट निर्माण शुरू करना व्यावहारिक दृष्टि से उचित फैसला नहीं था। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। इससे सीढ़ियों के निर्माण के लिए काटी गई मिट्टी दोबारा भर सकती है, जिसके कारण अब तक किया गया कार्य भी प्रभावित होगा और निर्माण एजेंसी को फिर से उसी स्थान पर काम करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने समय-निर्धारण पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का मानना है कि बढ़ते जलस्तर के कारण सीढ़ियों का निर्माण नदी के उस स्तर तक नहीं हो पाएगा, जहां तक इसकी वास्तविक आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानसून समाप्त होने के बाद शुरू किया जाता, तो परियोजना को अधिक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जा सकता था।
गौरीशंकर घाट का उदाहरण देकर जताई चिंता
स्थानीय लोगों ने पूर्व में बने गौरीशंकर घाट का उदाहरण भी दिया। उनका कहना है कि करीब दो वर्ष पहले बनाए गए घाट की सीढ़ियां निर्माण के कुछ ही समय बाद टूटने लगी थीं, जिससे घाट की स्थिति जर्जर और खतरनाक हो गई। इसे देखते हुए लोगों ने उमानाथ घाट पर चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय-निर्धारण को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
परियोजना के भविष्य पर अनिश्चितता
फिलहाल गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच उमानाथ घाट पर चल रहा सीढ़ी निर्माण कार्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो परियोजना की रफ्तार और अधिक प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्थानीय लोग प्रशासन और संबंधित एजेंसी से मौसम और जलस्तर को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य की प्रभावी योजना बनाने की मांग कर रहे हैं।