जिले के बांसडीह तहसील क्षेत्र के भोजपुरवा गांव में घाघरा नदी का कटान लगातार तेज होता जा रहा है। नदी के बढ़ते कटाव से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अपने वर्षों पुराने आशियाने को तोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में तटबंध (बंधे) का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
कटान घरों तक पहुंचा, पलायन को मजबूर ग्रामीण
कटान प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा नदी का कटाव अब उनके घरों तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, नदी और मकानों के बीच अब बहुत कम दूरी बची है। इसी खतरे को देखते हुए लोग अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
प्रशासन पर सुविधाएं न देने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। उनका कहना है कि कटान प्रभावित परिवारों के लिए न तो रहने की समुचित व्यवस्था की गई है और न ही बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
मोबाइल की रोशनी में बन रहा खाना
कटान पीड़ितों ने बताया कि रात के समय बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें मोबाइल की रोशनी में खाना बनाना पड़ रहा है। लगातार कटान के कारण हर समय डर का माहौल बना रहता है और परिवार असुरक्षा के साए में जीवन बिता रहे हैं।
'अधिकारी आते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता'
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने तो आते हैं, लेकिन अब तक राहत या पुनर्वास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे प्रभावित परिवारों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कटान पीड़ितों ने लगाई राहत की गुहार
कटान से प्रभावित भृगुनाथ यादव, मनोज कुमार यादव, लक्ष्मण यादव और सुरेंद्र नाथ यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत, सुरक्षित पुनर्वास, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कई और घर घाघरा नदी के कटान की भेंट चढ़ सकते हैं।