बिहार सरकार बेहतर और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था के दावे करती है, लेकिन सहरसा जिले से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। महिषी प्रखंड की कुंदह पंचायत में स्थित एक सरकारी मध्य विद्यालय आज भी भवन के बिना संचालित हो रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह स्कूल कोशी नदी के बिल्कुल किनारे चल रहा है, जहां हर दिन बच्चों की जान पर खतरा मंडराता रहता है।
कटाव में समा गया स्कूल भवन
यह मामला महिषी प्रखंड के कुंदह पंचायत स्थित मध्य विद्यालय का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, विद्यालय का मूल भवन कोशी नदी के कटाव में पूरी तरह बह गया। इसके बाद स्कूल को पास के एक सामुदायिक भवन और अस्थायी टिन शेड में संचालित किया जा रहा है। यहां पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई होती है।
नदी के किनारे पढ़ाई, हर पल हादसे का डर
विद्यालय के ठीक बगल से तेज बहाव के साथ कोशी नदी गुजरती है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ लगातार इस बात पर नजर रखनी पड़ती है कि कोई बच्चा खेलते-खेलते नदी की ओर न चला जाए। स्कूल में हर दिन किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
प्रधानाध्यापक ने कई बार भेजा प्रस्ताव
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल भवन कटाव में ध्वस्त होने के बाद मजबूरी में सामुदायिक भवन और टिन शेड में पढ़ाई कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यालय को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
शिक्षा विभाग ने जांच की बात कही
मामले पर जब नवपदस्थापित जिला शिक्षा पदाधिकारी से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कैमरे पर आने से इनकार करते हुए कहा कि पहले पूरे मामले की जांच कराई जाएगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी और बीडीओ सह प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि विद्यालय को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
सरकार के दावों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि यह विद्यालय बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री की पैतृक पंचायत कुंदह में स्थित है। वहीं यह क्षेत्र शिक्षा मंत्री के प्रभार वाले जिले में भी आता है। इसके बावजूद बच्चों को जोखिम भरे माहौल में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तक विद्यालय को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाता, तब तक यहां पढ़ने वाले सैकड़ों मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? अब यह देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई केवल जांच तक सीमित रहती है या फिर बच्चों को सुरक्षित और स्थायी विद्यालय उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।