रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को प्रशासन द्वारा अवैध घोषित किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और कर्मचारियों ने प्रोफेसर जहीरुद्दीन के नेतृत्व में परिसर से मुख्य गेट तक पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
काली पट्टी बांधकर यूनिवर्सिटी बचाने की उठाई मांग
पैदल मार्च में शामिल शिक्षकों और कर्मचारियों ने हाथों पर काली पट्टी बांधी और तख्तियां लेकर यूनिवर्सिटी को बचाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना और शिक्षा संस्थान को संरक्षित रखना है।
छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी
यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर छात्र-छात्राओं का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश के बावजूद छात्र टेंट लगाकर धरने पर डटे रहे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
"शिक्षा का मिशन हर हाल में जारी रहेगा"
पैदल मार्च के दौरान प्रोफेसर जहीरुद्दीन ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन में नहीं, बल्कि शिक्षा को बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के मिशन के तहत की गई थी और संस्थान को सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। शिक्षकों का वेतन छात्रों की फीस से दिया जाता है।
उन्होंने कहा, "अगर इमारतें गिरा भी दी जाएं, तब भी शिक्षा का मिशन नहीं रुकेगा। जरूरत पड़ी तो हम सड़क पर या पेड़ के नीचे भी बच्चों को पढ़ाएंगे।"
मामला न्यायालय में विचाराधीन
प्रोफेसर जहीरुद्दीन ने कहा कि चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कानूनी पहलुओं पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ, कर्मचारी और छात्र पूरी तरह एकजुट हैं तथा उन्हें रामपुर के अलावा प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से भी समर्थन मिल रहा है।
शांतिपूर्ण समाधान की जताई उम्मीद
उन्होंने चार दिनों से बारिश के बीच धरने पर बैठे छात्रों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकलेगा और बुलडोजर कार्रवाई जैसी स्थिति नहीं आएगी।
विरोध प्रदर्शन लगातार जारी
गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को अवैध घोषित किए जाने के बाद से विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। रामपुर समेत कई शहरों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी यूनिवर्सिटी के समर्थन में ज्ञापन सौंपे हैं, जबकि छात्र-छात्राएं मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।