डॉक्टरों के साथ लगातार हो रही मारपीट की घटनाओं के विरोध में बुधवार को पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। हालांकि, गंभीर मरीजों के इलाज के लिए इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
ओपीडी बंद होने से मरीजों को हुई परेशानी
ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौटने को मजबूर हुए।
अरवल और मोहनिया की घटनाओं से डॉक्टरों में आक्रोश
चिकित्सकों का कहना है कि अरवल जिले में सिविल सर्जन और कैमूर जिले के मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ हुई मारपीट की घटनाओं के बाद पूरे राज्य के डॉक्टरों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से दोषियों के खिलाफ संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।
वैक्सीन लगवाने आए लोगों को लौटना पड़ा
समहूता गांव से आए एक शिक्षक ने बताया कि परिवार के पांच सदस्यों को कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन की तीसरी डोज दिलाने के लिए वे अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन ओपीडी बंद होने के कारण उन्हें बिना टीका लगवाए ही वापस लौटना पड़ा।
डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग दोहराई
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अविनाश सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर पूरे बिहार में ओपीडी सेवाएं बंद रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि अरवल और मोहनिया की घटनाओं में प्रशासन जल्द प्रभावी और संतोषजनक कार्रवाई नहीं करता है, तो चिकित्सकों का आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।