जिले के आरक्षी केंद्र में उस समय कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों की भूमिका निभा रहे जवानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। मौके पर मौजूद लोग पहले इसे वास्तविक घटना समझ बैठे, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह पुलिस की ओर से आयोजित एक विशेष मॉक ड्रिल थी।
प्रदर्शनकारियों की भूमिका में जवान, पुलिस ने किया दंगा-रोधी अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान प्रदर्शनकारी की भूमिका निभा रहे जवान लगातार नारेबाजी करते हुए बैरिकेडिंग तोड़ने और आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। वहीं, पुलिस बल ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस और अन्य दंगा-रोधी उपायों का व्यावहारिक अभ्यास किया।
कानून-व्यवस्था से निपटने की तैयारियों का लिया गया जायजा
पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित छात्र आंदोलनों और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना था। इस दौरान पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग, आंसू गैस के इस्तेमाल, वाटर कैनन के संचालन और उपद्रव की स्थिति में त्वरित कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया गया।
सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जिले के पुलिस बल को हर तरह की आपात स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी के तहत सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द कर दी गई हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पर्याप्त पुलिस बल तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।