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मगरमच्छ के खौफ के बीच ग्रामीणों ने खुद बनाया पुल, सिस्टम को दिखाई राह

प्रकाशित: 28-07-2026, 09:16 AM
मगरमच्छ के खौफ के बीच ग्रामीणों ने खुद बनाया पुल, सिस्टम को दिखाई राह
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बगहा: पश्चिम चंपारण के बगहा स्थित नौरंगिया थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव से होकर गुजरने वाली भपसा नहर में मगरमच्छों के लगातार हमलों से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासनिक इंतजार छोड़ खुद पहल की। ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर और श्रमदान के जरिए महज एक रात में नहर पर चचरी पुल का निर्माण कर अनोखी मिसाल पेश की।

मगरमच्छों के हमलों से दहशत में थे ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, लगातार बारिश के बाद गंडक नदी का पानी सहायक नहरों और नालों में पहुंचने से कई मगरमच्छ रिहायशी इलाकों तक आ गए हैं। इससे लोगों की जान-माल पर खतरा बढ़ गया है और नहर पार करना जोखिम भरा हो गया है।

20 जुलाई को किसान की मौत, महिला भी हुई घायल

ग्रामीणों ने बताया कि 20 जुलाई को नहर पार करते समय मगरमच्छ के हमले में किसान केदार बैठा की मौत हो गई थी। वहीं रविवार सुबह भी नहर पार कर रही एक महिला पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

खेती तक पहुंचने के लिए रोज पार करनी पड़ती थी नहर

बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के कारण भपसा नहर में कमर तक पानी भरा हुआ है। नहर के दूसरी ओर हजारों किसानों की खेती है। धान की रोपाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को रोज इसी नहर को पार करना पड़ता था, जिससे हर दिन जान का खतरा बना रहता था।

प्रशासन से गुहार के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाया कदम

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग और प्रशासन से कई बार सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करने की मांग की गई, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं चंदा एकत्र किया और श्रमदान के माध्यम से रातोंरात चचरी पुल का निर्माण कर लिया।

विधायक ने दी आर्थिक सहायता

वाल्मीकिनगर विधानसभा के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि बरसात के दौरान स्थायी पुल का निर्माण तत्काल संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने चचरी पुल के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, ताकि किसानों को नहर का पानी पार न करना पड़े और मगरमच्छों के हमलों से बचाया जा सके।

वन विभाग ने जारी की सावधानी बरतने की अपील

वीटीआर (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व) के मदनपुर वन क्षेत्र के रेंजर नसीम अहमद अंसारी ने बताया कि भपसा नहर तिरहुत कैनाल से जुड़ी है, जहां बारिश के दौरान गंडक नदी से मगरमच्छ पहुंच जाते हैं। वन विभाग ने पहले भी मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिलहाल लोगों से नहर पार न करने की अपील की जा रही है।

मृतक के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा मिलेगा

वन विभाग ने बताया कि मगरमच्छ के हमले में जान गंवाने वाले किसान के परिजनों को नियमानुसार ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं घायल महिला के मामले की जांच के बाद उपचार के लिए भी नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

ग्रामीणों की पहल बनी मिसाल

ग्रामीणों द्वारा चंदा और श्रमदान से तैयार किया गया चचरी पुल अब स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित आवाजाही का माध्यम बन गया है। इस पहल को क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग और जनभागीदारी की एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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