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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में घूसखोरी के आरोप, लाभार्थियों ने डीएम से की शिकायत

प्रकाशित: 28-07-2026, 11:03 AM
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में घूसखोरी के आरोप, लाभार्थियों ने डीएम से की शिकायत
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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत लाभ दिलाने के नाम पर कथित घूसखोरी के आरोप सामने आए हैं। खड्डा तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत छीतौनी के कई लाभार्थियों ने जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर को लिखित शिकायत देकर वार्ड सदस्य पर रिश्वत मांगने और भुगतान न करने पर योजना का लाभ रोकने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

'आवास पास कराने के नाम पर मांगे गए पैसे'

नगर पंचायत छीतौनी के वार्ड नंबर-7 निवासी मुन्ना गोंड, पुत्र रामचंदर ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और झोपड़ी व कच्चे मकान में रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन होने के बाद वार्ड सदस्य ने आवास स्वीकृत कराने के नाम पर ₹10 हजार की मांग की। शिकायत के अनुसार, राशि देने के बाद जांच प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन बाद में ₹5 हजार की अतिरिक्त मांग भी की गई।

वृद्ध महिला ने दूसरी किस्त के लिए फिर पैसे मांगने का लगाया आरोप

वार्ड नंबर-7 आजाद नगर की निवासी हसीना, पत्नी हमीद ने भी जिलाधिकारी को दिए गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पहले ही ₹10 हजार लिए गए। उनका दावा है कि पहली किस्त मिलने के बाद दूसरी किस्त जारी कराने के लिए फिर ₹10 हजार की मांग की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पैसे नहीं देने पर जांच और दूसरी किस्त का भुगतान रोकने की धमकी दी गई।

एक अन्य लाभार्थी ने भी लगाया रिश्वत मांगने का आरोप

इसी वार्ड के निवासी महेन्द्र, पुत्र घुरा ने भी वार्ड सदस्य के खिलाफ जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। उन्होंने भी योजना के लाभ के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया है।

कार्रवाई की मांग, सुनवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे अपनी समस्याओं और कथित घूसखोरी की शिकायत लेकर प्रशासन के पास पहुंचे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।

पहले भी भ्रष्टाचार पर सख्ती के निर्देश दे चुके हैं डीएम

गौरतलब है कि कुशीनगर के जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत न लेने और न देने को लेकर सख्त निर्देश दे चुके हैं। अब इन शिकायतों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि यदि आरोप सही हैं, तो जमीनी स्तर पर उन निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है और शिकायतों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

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