समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों और आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और इसका सबसे अधिक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है।
'यूपी में 22 हजार प्राथमिक स्कूल बंद हुए'
अखिलेश यादव ने दावा किया कि देश में बंद हुए प्राथमिक विद्यालयों में सबसे अधिक 22 हजार स्कूल उत्तर प्रदेश में बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में भी, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र रहा है, करीब 500 प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई स्कूलों के मर्जर के नाम पर की गई।
इंटरमीडिएट, पॉलिटेक्निक और आईटीआई में दाखिलों पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने कहा कि इंटरमीडिएट विद्यालयों में छात्रों का दाखिला कम हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों में भी अपेक्षित संख्या में प्रवेश नहीं हो रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
उच्च शिक्षा में नियुक्तियों को लेकर लगाए आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में एक ही विचारधारा से जुड़े लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ये नियुक्तियां किसके निर्देश पर की जा रही हैं और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
आरक्षण व्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना
सपा सांसद ने कहा कि यदि सरकार के एजेंडे में रोजगार नहीं है, तो इसका असर आरक्षण व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, विशेष रूप से दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण के अधिकारों के साथ व्यापक स्तर पर अन्याय हो रहा है।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
अखिलेश यादव के इन आरोपों पर फिलहाल केंद्र सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।