महुआ खबर - Latest News & Updates | महुआ खबर | mahua Khabar
होम राशिफल
शॉर्ट वीडियो
ई-पेपर सर्च

पंचक में क्यों नहीं उठाते कांवड़? नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताई धार्मिक मान्यता

प्रकाशित: 04-08-2026, 09:51 AM
पंचक में क्यों नहीं उठाते कांवड़? नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताई धार्मिक मान्यता
शेयर करें:

सावन माह में कांवड़ यात्रा को लेकर शिवभक्तों में विशेष उत्साह रहता है, लेकिन पंचक के दौरान कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करने से परहेज करते हैं। इस विषय पर हरिद्वार स्थित नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज त्रिपाठी ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर जानकारी साझा की है।

क्या होता है पंचक?

मुख्य पुजारी मनोज त्रिपाठी के अनुसार, धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से लेकर रेवती नक्षत्र के अंत तक की अवधि को पंचक कहा जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस समय को कुछ विशेष कार्यों के लिए संवेदनशील माना जाता है।

पंचक में कांवड़ यात्रा से क्यों बचते हैं श्रद्धालु?

उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं, वे पंचक के दौरान यात्रा करने से परहेज करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किसी कार्य की सिद्धि के लिए सामान्य से अधिक प्रयास करने पड़ सकते हैं।

इन कार्यों से बचने की है परंपरा

मुख्य पुजारी के अनुसार, धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा, मकान की छत डालना, कॉलम खड़ा करना और दाह संस्कार से जुड़े कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

शिव पूजा और जलाभिषेक पर नहीं है कोई रोक

उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचक के दौरान भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और जलाभिषेक पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। श्रद्धालु इस अवधि में भी पूरी श्रद्धा के साथ शिव आराधना और गंगाजल अर्पित कर सकते हैं।

0.0
Average Rating
0 Ratings
Tap a star to rate this article: