तुलसीपुर के बहुचर्चित पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू हत्याकांड में एमपी-एमएलए कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और दामाद रमीज नेमत को बरी कर दिया।
हत्या, हत्या के प्रयास और गैंगस्टर एक्ट में मिली राहत
अदालत ने इन तीनों आरोपियों को हत्या के साथ-साथ हत्या के प्रयास और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में भी दोषमुक्त करार दिया। वहीं, मामले के दो अन्य सह-आरोपियों महफूज और मेराजुल हक के संबंध में फैसला अदालत ने 11 अगस्त के लिए सुरक्षित रखा है। एक अन्य आरोपी शकील की पहले ही मौत हो चुकी है।
2022 में हुई थी फिरोज पप्पू की हत्या
गौरतलब है कि 4 जनवरी 2022 की रात तुलसीपुर-जरवा मार्ग पर फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की धारदार हथियार और लोहे की रॉड से हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक के भाई अफरोज अहमद की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
राजनीतिक रंजिश की सामने आई थी थ्योरी
पुलिस की विवेचना के दौरान राजनीतिक वर्चस्व और रंजिश को हत्या की वजह बताया गया था। जांच में यह आरोप सामने आया था कि आगामी चुनाव में जेबा रिजवान को टिकट दिलाने की कोशिशों के बीच फिरोज पप्पू राजनीतिक रूप से एक चुनौती बन रहे थे। इसी कथित रंजिश के चलते हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप लगाया गया था।
साढ़े चार साल चली कानूनी लड़ाई
मामले की सुनवाई करीब साढ़े चार साल तक चली। इस दौरान लगभग 45 तारीखों पर सुनवाई हुई और 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश (तृतीय) प्रदीप कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
'आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए'
बचाव पक्ष के अधिवक्ता डॉ. राजेश त्रिपाठी की दलीलों और अदालत में पेश दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष इन तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
फैसले से पहले न्यायालय परिसर में भारी सुरक्षा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शुक्रवार को न्यायालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सीओ सिटी अभिषेक सिंह की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और शाम करीब 4:30 बजे फैसला सुनाया गया। तुलसीपुर कस्बे और पूर्व सांसद के आवास के आसपास भी एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया।
रिहाई के बाद समर्थकों में खुशी
फैसले के बाद रिजवान जहीर, जेबा रिजवान और रमीज नेमत के बाहर आने पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। समर्थकों ने नारेबाजी की कोशिश की, लेकिन रिजवान जहीर ने हाथ जोड़कर संयम बरतने की अपील की। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए फैसले को सत्य की जीत बताया।
वादी पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की कही बात
फैसले से मृतक के भाई और मामले के वादी अफरोज अहमद ने असहमति जताई। उनका कहना है कि कुछ अहम तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करेंगे।