झारखण्ड/पलामू। पलामू जिले में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की बहाली लिखित परीक्षा के माध्यम से कराने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन पांचवें दिन भी जारी है। अनशन पर बैठे छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। पांच दिनों से अन्न ग्रहण नहीं करने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है।
अनशन स्थल पर मौजूद चिकित्सक डॉ. मिश्रा की टीम के अनुसार, सत्यनारायण शुक्ला को अब तक दो बोतल स्लाइन चढ़ाई जा चुकी है। डॉक्टर का कहना है कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनकी स्थिति कभी भी गंभीर हो सकती है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है। रात करीब 10:30 बजे डॉ. मिश्रा ने अनशन स्थल पर पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य जांच की। इस दौरान बीपी और शुगर समेत अन्य स्वास्थ्य मानकों की जांच की गई।
मच्छरों के बीच रात गुजार रहे अनशनकारी, मच्छरदानी लगाकर भी मांग पर डटे...
पांच दिनों से जारी अनशन के दौरान सत्यनारायण शुक्ला और अन्य अनशनकारी रात में भी आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। रात के अंधेरे में मच्छरों के बीच मच्छरदानी लगाकर वे अपनी मांग को लेकर बैठे हैं। लगातार पांच दिनों से अन्न त्यागने के बावजूद अनशनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन की ओर से उनकी मांग पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अनशन जारी रहेगा।
डीसी के आश्वासन पर अड़े अनशनकारी
अनशनकारियों को समझाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सदर एसडीएम संजय पाण्डेय भी पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत कर अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन अनशनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे।
सत्यनारायण शुक्ला का कहना है कि वे जिला प्रशासन से किसी ठोस आश्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पलामू डीसी स्वयं आकर उनकी मांग पर आश्वासन देते हैं तो वे अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि पांच दिन पूरे होने जा रहे हैं और अब छठा दिन शुरू हो जाएगा, लेकिन अभी तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
‘मेरिट की जगह परीक्षा लेने में क्या परेशानी है?’
अनशन पर बैठे सत्यनारायण शुक्ला ने कहा कि उनकी मांग बेहद स्पष्ट है। चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति केवल मैट्रिक के अंकों के आधार पर मेरिट से करने के बजाय अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा ली जाए और परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर चयन किया जाए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मेरिट की जगह अभ्यर्थियों की परीक्षा लेकर चयन करने में आखिर क्या परेशानी है? उनका कहना है कि लिखित परीक्षा होने से सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने भी समझाने का किया प्रयास
अनशन समाप्त कराने के लिए झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने भी आंदोलनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, अनशनकारी अपनी मांग पर कायम रहे। उनका कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से लिखित परीक्षा के मुद्दे पर आश्वासन मिलने के बाद ही वे अनशन समाप्त करेंगे।
क्या है चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी बहाली का पूरा मामला?
पलामू में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की बहाली को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2017 की नियुक्ति से जुड़ी हुई है। पूर्व में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। बाद में इस नियुक्ति को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनवरी 2025 में पूर्व में नियुक्त चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई।
आंदोलनकारियों के अनुसार, न्यायालय की ओर से राज्य सरकार को नई नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सरकार की ओर से नई बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई।
हालांकि, नई बहाली प्रक्रिया में मैट्रिक के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार कर नियुक्ति किए जाने की बात सामने आने के बाद अभ्यर्थियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल मैट्रिक के अंकों को आधार बनाकर चयन करने से सभी उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिलेगा। उनकी मांग है कि लिखित परीक्षा आयोजित कर अभ्यर्थियों का चयन किया जाए। इसके लिए परीक्षा का सिलेबस और परीक्षा की तिथि भी जल्द घोषित करने की मांग की जा रही है।
नौ साल सेवा के बाद बेरोजगारी का सामना
आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्ष 2017 में नियुक्त कई चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों ने करीब नौ वर्षों तक सेवा दी, लेकिन सेवा समाप्त होने के बाद उन्हें बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कुछ ऐसे कर्मचारी भी थे, जो वर्ष 2026-27 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक सरकारी सेवा करने के बाद अचानक नौकरी समाप्त होने से प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
16 महीनों से मांग को लेकर संघर्ष
छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला के अनुसार, चतुर्थ वर्गीय बहाली में लिखित परीक्षा की मांग को लेकर वे पिछले करीब 16 महीनों से लगातार प्रयासरत हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कार्मिक विभाग के अधिकारियों और सरकार के अन्य जिम्मेदार लोगों तक अपनी मांग पहुंचाई गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका।
इसी के बाद उन्होंने रांची और दिल्ली जाकर आंदोलन करने के बजाय पलामू में ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया।
अनशनकारियों का कहना है कि उनकी मांग किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देने और बहाली प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने से जुड़ी है।
फिलहाल प्रशासन और अनशनकारियों के बीच गतिरोध
फिलहाल अनशन स्थल पर चिकित्सकों की टीम मौजूद है और समय-समय पर सत्यनारायण शुक्ला के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। प्रशासन की ओर से सदर एसडीएम ने बातचीत कर अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया है, जबकि अनशनकारी पलामू डीसी से सीधे आश्वासन मिलने की मांग पर कायम हैं।
अब देखना होगा कि पांच दिन से जारी इस अनशन को समाप्त कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से क्या पहल की जाती है और चतुर्थ वर्गीय बहाली में लिखित परीक्षा की मांग पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।