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आदिवासी संस्कृति व परंपरा ही सभ्यता की आधारशिला है : अविनाश देव

Ranjeet kumar gupta
प्रकाशित: 09-08-2026, 05:10 PM
मेदिनीनगर में विश्व आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक झांकी निकालते संत मरियम स्कूल के विद्यार्थी
विश्व आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक झांकी प्रस्तुत करते संत मरियम स्कूल के विद्यार्थी।
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झारखण्ड/पलामू। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संत मरियम स्कूल के छात्र-छात्राओं ने रविवार को आदिवासी संस्कृति और परंपरा को समर्पित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर शहर की सड़कों पर गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हुए सांस्कृतिक झांकी निकाली। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपरा, भाषा, बोली और प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।

सांस्कृतिक झांकी की शुरुआत पलामू उपायुक्त आवास से हुई। इस दौरान पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने झांकी और आदिवासी नृत्य का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की। इस अवसर पर उपायुक्त का पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया।

इसके बाद झांकी शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। विद्यार्थियों ने छह मोहान चौक, पंच मोहान, भगत सिंह चौक और साहित्य समाज चौक होते हुए पुलिस लाइन तक नगर भ्रमण किया, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों के गीत और नृत्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए अविनाश देव ने कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपरा ही सभ्यता की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय जल, जंगल, जमीन, खान-खनिज और पर्यावरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। प्रकृति के साथ जिस तरह विकास के नाम पर छेड़छाड़ की जा रही है, उससे मानव जीवन का अस्तित्व भी खतरे में पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व के कई आदिवासी समुदाय अपनी पहचान और अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। भारत की जरावा जनजाति समेत दुनिया की कई जनजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। ऐसी जनजातियों की परंपरा, संस्कृति, भाषा और बोली को संरक्षित करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व आदिवासी दिवस मनाने की पहल की गई।

अविनाश देव ने कहा कि आज झारखंड में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर उत्साह का माहौल है। मोरहाबादी मैदान से लेकर नेतरहाट की पहाड़ियों तक और गांव-कस्बों में आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और पहचान को बचाने के लिए एकजुट होकर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान, सिद्धू-कान्हू के हूल तथा नीलांबर-पीतांबर की संघर्ष और विरासत की भावना को आगे बढ़ाते हुए आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु के सपनों को साकार करने और आदिवासीयत को बचाए रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना जरूरी है।

अविनाश देव ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पलामू जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने संत मरियम विद्यालय के बच्चों को आदिवासी संस्कृति और परंपरा को समझने तथा उसे प्रस्तुत करने का अवसर दिया। उन्होंने विश्वभर के आदिवासी समाज के लोगों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए 'जोहार' कहा।

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