झारखण्ड/बेतला। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर 12 अगस्त 2026 को पलामू व्याघ्र परियोजना (PTR) एवं बेतला नेशनल पार्क में वन्यजीव संरक्षण को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को हाथियों और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने के साथ-साथ हाथियों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महावतों को सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से बच्चों और स्थानीय समुदाय को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने तथा मानव-हाथी सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया।
चार हाथियों का किया गया विशेष श्रृंगार
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बेतला के प्रसिद्ध हाथी जूही, राखी, सीता और मुरगेश रहे। चारों हाथियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिसे देखने के लिए स्कूली बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने हाथियों को नजदीक से देखा और उनके व्यवहार एवं जीवनशैली को समझने का अवसर प्राप्त किया।
बच्चों ने हाथियों को अपने हाथों से खिलाए फल
वन्यजीव संरक्षण के प्रति बच्चों में अपनापन और संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से उन्हें हाथियों को फल खिलाने का अवसर दिया गया। बच्चों ने अपने हाथों से हाथियों को फल खिलाए। इस दौरान बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला।
वन विभाग का मानना है कि बचपन से ही बच्चों को वन्यजीवों और प्रकृति से जोड़ने से भविष्य में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और मजबूत होगी।
अधिकारियों ने बताया हाथियों के व्यवहार और सह-अस्तित्व का महत्व
कार्यक्रम के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कॉन्फ्रेंस रूम में स्कूली बच्चों को संबोधित किया। अधिकारियों ने हाथियों के व्यवहार, उनकी आदतों, जीवनशैली तथा जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी।
बच्चों को मानव-हाथी सह-अस्तित्व (Man-Elephant Coexistence) के महत्व से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि हाथियों और मनुष्यों के बीच बेहतर तालमेल तथा जंगल और उसके आसपास रहने वाले समुदायों में जागरूकता वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
डॉक्यूमेंट्री फिल्म के जरिए दी गई जानकारी
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को हाथियों के जीवन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित एक ज्ञानवर्धक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। फिल्म के माध्यम से बच्चों को हाथियों के जीवन चक्र, उनके प्राकृतिक आवास, जंगल के पर्यावरण में उनकी भूमिका और संरक्षण की आवश्यकता को समझने का अवसर मिला।
महावतों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में हाथियों की देखभाल और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महावतों को सम्मानित किया गया। महावत हाथियों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और उनकी देखभाल, भोजन, स्वास्थ्य तथा दैनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें सम्मानित कर वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण में उनके योगदान को सम्मान दिया।
संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
विश्व हाथी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। बेतला नेशनल पार्क में स्थानीय एवं सरकारी विद्यालयों के बच्चों की सहभागिता से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रकृति, जंगल और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने में मदद मिलती है। विशेष रूप से बच्चों को हाथियों के करीब लाकर उनके बारे में वैज्ञानिक और व्यवहारिक जानकारी देना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
ये अधिकारी और कर्मी रहे मौजूद
कार्यक्रम में पी.के. जेना, उप निदेशक, पलामू व्याघ्र परियोजना, उमेश दुबे, वन क्षेत्र पदाधिकारी, बेतला, संतोष सिंह, प्रधान वनरक्षी, दीपक मिश्रा, प्रभारी वनरक्षी सहित हाथी महावत, वन विभाग के कर्मी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।