बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे उत्तरवाहिनी गंगा तट स्थित ऐतिहासिक उमानाथ मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं उमानाथ कॉरिडोर निर्माण कार्य की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। करीब एक वर्ष पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य अब तक बेहद धीमी गति से चल रहा है।
100 करोड़ रुपये की परियोजना
उमानाथ कॉरिडोर परियोजना पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें से 13.9 करोड़ रुपये केवल उमानाथ मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर व्यय किए जाने का प्रावधान है। सरकार का उद्देश्य इस धार्मिक स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए प्रमुख पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करना है।
18 महीने में पूरा होना है निर्माण कार्य
योजना के अनुसार उमानाथ कॉरिडोर का निर्माण 18 महीने के भीतर पूरा किया जाना है। परियोजना के तहत शादी मंडप, सामुदायिक भवन, मार्केट कॉम्प्लेक्स, पार्किंग जोन, गंगा रिवर फ्रंट, श्मशान घाट का विकास, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, साधकों के लिए जाप स्थल, श्रद्धालुओं के विश्राम हेतु मल्टीपरपज भवन, विवाह भवन और मंदिरों के जीर्णोद्धार सहित कई सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है।
आठ महीने में 10 प्रतिशत काम भी नहीं हुआ पूरा
निर्माण कार्य शुरू हुए लगभग आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक परियोजना का 10 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्माण पूरा होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
भूमि विवाद बना निर्माण में बड़ी बाधा
उमानाथ मंदिर के स्थानीय पुजारी निगमानंद भारती ने बताया कि मंदिर परिसर से सटी कुछ सरकारी भूमि को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है। जब तक भूमि विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक पूरे परिसर को खाली कराकर निर्माण कार्य को गति देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यही परियोजना की धीमी प्रगति का सबसे बड़ा कारण है।
संवेदक ने टिप्पणी करने से किया इनकार
वहीं, निर्माण कार्य करा रहे संवेदक से परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भूमि विवाद का समाधान कब होता है और परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर कितनी तेजी से बढ़ पाती है।