मेरठ। शहर के एक निजी अस्पताल में 14 दिन के नवजात की मौत के बाद परिजनों ने गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पर प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने और अस्पताल स्टाफ की कथित संवेदनहीनता के कारण मासूम की जान चली गई। मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की गई है।
'ढाई घंटे तक डॉक्टर नहीं पहुंचे'
केसरगंज (बर्फ वाली गली) निवासी आसिफ ने बताया कि उनके बेटे का जन्म 14 दिन पहले सिवाय हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए हुआ था। उनका आरोप है कि जन्म के बाद से ही मां और नवजात दोनों की तबीयत ठीक नहीं थी।
परिजनों के अनुसार, 30 जून की सुबह करीब 3 बजे जब नवजात की हालत अचानक बिगड़ गई, तो उसे तत्काल सिवाय हॉस्पिटल ले जाया गया। आरोप है कि इमरजेंसी स्टाफ ने डॉक्टर को बुलाने की बात कहकर ₹800 फीस जमा कराई, लेकिन करीब ढाई घंटे तक कोई डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं पहुंचा।
'फीस वापस नहीं की, दूसरे अस्पताल भी नहीं जाने दिया'
परिजनों का आरोप है कि जब बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई तो उन्होंने फीस वापस मांगी, ताकि किसी दूसरे अस्पताल में इलाज कराया जा सके। लेकिन अस्पताल स्टाफ ने कथित तौर पर पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और डॉक्टर के आने का इंतजार करने को कहा। इसी दौरान नवजात ने अस्पताल परिसर में दम तोड़ दिया।
ऑपरेशन में भी लापरवाही का आरोप
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान भी ऑपरेशन सही तरीके से नहीं किया गया था, जिसके कारण नवजात की मां को लगातार परेशानी होती रही। उनका कहना है कि शिकायत करने पर डॉक्टर ने स्थिति सामान्य होने का भरोसा देकर मामले को टाल दिया।
CMO ने दिए जांच के आदेश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रसाद ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर अस्पताल के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम पूरे घटनाक्रम, डॉक्टर की उपलब्धता और इलाज में हुई कथित देरी की जांच करेगी।
लापरवाही साबित हुई तो होगी सख्त कार्रवाई
सीएमओ ने कहा कि यदि जांच में डॉक्टर या अस्पताल स्टाफ की लापरवाही, इलाज में देरी या जबरन फीस वसूलने जैसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने सहित संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।