भागलपुर/सुल्तानगंज: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने में अब महज 13 दिन शेष हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से अजगैविनाथ गंगा घाट और नमामि गंगे घाट सहित मेला क्षेत्र में तैयारियों को युद्धस्तर पर पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं अब भी अधूरी नजर आ रही हैं।
कांवड़िया पथ की स्थिति चिंताजनक
श्रावणी मेला में लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन का प्रमुख मार्ग कांवड़िया पथ कई स्थानों पर जर्जर और कीचड़युक्त बना हुआ है। मिट्टी और बालू बिछाने का कार्य धीमी गति से चल रहा है, जिससे रास्ते में गड्ढे और जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जर्मन हैंगर का निर्माण तेज, लेकिन अन्य सुविधाएं अधूरी
धांधली-बेलारी क्षेत्र में कांवड़ियों के ठहरने के लिए जर्मन हैंगर का निर्माण युद्धस्तर पर किया जा रहा है। हालांकि, मेला क्षेत्र में बनाए गए पार्किंग स्थलों पर अब तक शौचालय, पेयजल और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
तैयारियों में लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित विभागों की सुस्ती के कारण कई कार्य अभी भी अधूरे हैं। लोगों का कहना है कि यदि तैयारियों की यही रफ्तार रही, तो श्रावणी मेला में आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं मिलना मुश्किल हो जाएगा।
दुकानदारों ने शुरू की तैयारी
कांवड़िया पथ के किनारे स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगानी शुरू कर दी हैं। दुकानदारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का आगमन धीरे-धीरे शुरू हो चुका है। दुकानें तैयार होने के बाद कांवड़ियों को भोजन, पेयजल और ठहरने जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
प्रशासन पर बढ़ी जिम्मेदारी
श्रावणी मेला देशभर से आने वाले लाखों शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि शेष दिनों में सभी अधूरे कार्य समय पर पूरे कर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।