बिहार सरकार ने राज्य के गन्ना उद्योग को नई गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी देते हुए राज्य में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनर्परिचालन का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इस पहल से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
25 नई चीनी मिलें होंगी स्थापित
नई नीति के तहत बिहार के विभिन्न जिलों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे, ताकि गन्ना उद्योग को मजबूती मिल सके।
डिस्टिलरी, पावर प्लांट और CBG यूनिट भी बनेंगी
सरकार के अनुसार, नई चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी, को-जनरेशन पावर प्लांट और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) यूनिट भी स्थापित किए जाएंगे। इससे गन्ने से जुड़े उद्योगों का विस्तार होगा और अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
सासामूसा और मोतीपुर चीनी मिलों पर विशेष फोकस
सरकार ने गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल के पुनर्परिचालन की दिशा में पहल करने का फैसला किया है। वहीं मुजफ्फरपुर की बंद मोतीपुर चीनी मिल की जमीन पर नई चीनी मिल के साथ गन्ना अनुसंधान केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।
किसानों को मिलेगा मुफ्त गन्ना बीज
गन्ना उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किसानों को निःशुल्क गन्ना बीज उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
SBI, VSI पुणे और IIT पटना के साथ होगा सहयोग
गन्ना विकास और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार SBI, VSI पुणे और IIT पटना के साथ समझौता (MoU) करेगी। इस सहयोग के माध्यम से उद्योग में निवेश, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की योजना है।
रोजगार और निवेश बढ़ने का सरकार का दावा
सरकार का दावा है कि नई नीति लागू होने से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिलेगा। साथ ही बिहार का चीनी उद्योग फिर से विकास की राह पर आगे बढ़ सकेगा।