मेरठ में यूरिया और डीएपी खाद की भारी किल्लत तथा कथित कालाबाजारी को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान और पदाधिकारी जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
यूरिया की कमी से परेशान किसान, निजी दुकानों पर मनमानी का आरोप
किसानों का आरोप है कि जिले की सहकारी समितियों में यूरिया का स्टॉक खत्म हो चुका है, जबकि निजी दुकानों पर खाद के साथ गैर-जरूरी और महंगे कृषि उत्पाद जबरन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विक्रेता मनमाने दामों पर खाद बेचकर किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
'प्रशासन नहीं चेता तो होगा बड़ा आंदोलन'
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि किसान इस समय फसल की बुवाई और सिंचाई के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, लेकिन खाद की उपलब्धता नहीं होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि विभाग और प्रशासन कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो जिला मुख्यालय का घेराव किया जाएगा। साथ ही 1 सितंबर को महापंचायत आयोजित करने की भी घोषणा की गई।
भाकियू ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से भाकियू टिकैत ने प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सहकारी समितियों पर यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना, निजी दुकानों पर कालाबाजारी और जबरन उत्पाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना, आवारा पशुओं के लिए स्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाना, सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर रोक लगाकर दोषियों पर कार्रवाई करना, अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाना तथा गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए किसानों की लंबित भुगतान राशि जारी करना शामिल है।
समयबद्ध कार्रवाई की मांग
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान नेताओं ने प्रशासन से सभी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि महंगाई, मौसम की मार और खाद संकट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो किसान लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।