सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉमेडियन समय रैना, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने सभी को दो सप्ताह के भीतर यह राशि जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं करने पर जुर्माने की राशि बढ़ाई जा सकती है।
अदालत के आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्रवाई अपने पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर की। अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि ये सभी अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे और उनके सम्मान तथा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करेंगे। अदालत के अनुसार, इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
SMA फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ Cure SMA India Foundation की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि समय रैना ने अपने शो में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी और दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाने वाली टिप्पणियां की थीं। याचिका में अन्य कॉमेडियंस के कथित आपत्तिजनक कंटेंट का भी उल्लेख किया गया था।
ऑनलाइन कंटेंट को लेकर नियम बनाने की मांग
याचिका में ऐसे ऑनलाइन कंटेंट के प्रसारण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई, जो दिव्यांग व्यक्तियों के सम्मान और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता हो।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि समय रैना ने अदालत के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। पीठ ने उनके कथित आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के आदेशों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
कोर्ट में क्या हुई बहस?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने दलील दी कि अदालत के निर्देशों के बावजूद दिव्यांग व्यक्तियों को कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया। वहीं समय रैना की ओर से अदालत को बताया गया कि दिव्यांगों के लिए धन जुटाया गया है। इस पर अदालत ने कहा कि केवल धन जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूर्व आदेशों का वास्तविक पालन भी जरूरी है।
पहले भी दिए गए थे निर्देश
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को निर्देश दिया था कि वे हर महीने दिव्यांग व्यक्तियों की प्रेरक जीवन यात्राओं पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करें और विशेष रूप से SMA जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए जागरूकता और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का प्रयास करें। अदालत ने भविष्य में सभी संबंधित पक्षों को अपने आचरण के प्रति सावधान रहने की भी हिदायत दी।