भोजपुर: जिले में गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने के साथ ही बाढ़ और कटाव की आशंका गहराने लगी है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने शाहपुर प्रखंड के जवइनिया (जवानिया) गांव को गंगा कटाव से बचाने के लिए ₹52.56 करोड़ की लागत से कटावरोधी परियोजना शुरू की है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बक्सर की ओर से 1.25 किलोमीटर लंबे तटबंध पर बोल्डर पिचिंग का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है।
कटाव रोकने के लिए बोल्डर पिचिंग का कार्य जारी
बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध के 58 से 59.20 किलोमीटर के बीच कटाव रोकने के लिए बड़े पैमाने पर बोल्डर पिचिंग की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य जवइनिया, गंगापुर, भूसौला और नंदपुर जैसे गांवों को गंगा कटाव से सुरक्षित रखना है। जिला प्रशासन के अनुसार यह कार्य करीब एक महीने पहले शुरू किया गया था और इसे तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों की निगरानी में चल रहा कार्य
जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार निर्माण स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग बाढ़ पूर्व तैयारियों और कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता की नियमित समीक्षा कर रहा है ताकि मानसून के दौरान किसी तरह की बड़ी क्षति से बचा जा सके।
विस्थापित परिवारों को राहत और पुनर्वास
जिला प्रशासन की ओर से कटाव प्रभावित परिवारों को राहत भी दी जा रही है। प्रभावित परिवारों को ₹1.20 लाख की गृह क्षति सहायता राशि प्रदान की जा रही है। वहीं भूमिहीन परिवारों को जमीन का पर्चा देने और बिलौटी गांव में स्थायी आवास के लिए टाउनशिप निर्माण की स्वीकृति भी दी गई है। बीते वर्षों में जवइनिया गांव का बड़ा हिस्सा गंगा में समा चुका है, जिसके बाद कई परिवारों को बिलौटी के समीप पुनर्वासित किया गया।
अन्य गांवों में भी कटाव का खतरा बरकरार
शाहपुर के अलावा बड़हरा प्रखंड के नेकनाम टोला, केवटिया, मझौली, अचरज लाल का टोला और मौजपुर सहित कई इलाकों में भी गंगा का कटाव जारी है। इन क्षेत्रों में जिला प्रशासन जियो बैग डालकर कटाव रोकने का प्रयास कर रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सहायता समय पर नहीं मिलती, जिसका खामियाजा उन्हें हर साल भुगतना पड़ता है।
पीपा पुल हटाया गया, नाव बनी सहारा
महुली में संभावित बाढ़ को देखते हुए पीपा पुल खोल दिया गया है। इसके बाद स्थानीय लोगों की आवाजाही अब नावों के सहारे हो रही है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो कई गांवों के साथ-साथ आरा शहर के गांगी समेत निचले इलाकों में भी पानी फैलने की आशंका है।
हर साल बाढ़ से जूझता है बड़हरा क्षेत्र
भोजपुर का बड़हरा प्रखंड गंगा और सोन नदी के कारण हर वर्ष बाढ़ की मार झेलता है।
- 2025: गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। जवइनिया गांव के 500 से अधिक घर नदी में समा गए और फसलों को भारी नुकसान हुआ।
- 2024: अगस्त-सितंबर में आई बाढ़ से बड़हरा की 21 से अधिक पंचायतें जलमग्न हो गई थीं। राज्य सरकार ने क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित किया था।
- 2021 और 2019: गंगा के रिकॉर्ड जलस्तर ने दियारा और निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। हजारों लोगों को तटबंधों पर शरण लेनी पड़ी।
- 1998 और 1975: इन वर्षों की ऐतिहासिक बाढ़ में भोजपुर के कई तटबंध क्षतिग्रस्त हुए और बड़े पैमाने पर जन-धन का नुकसान हुआ।
बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की नजर
फिलहाल गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विभाग का दावा है कि कटावरोधी कार्य समय पर पूरा कर लिया जाएगा, जबकि ग्रामीण चाहते हैं कि राहत और सुरक्षा के उपाय केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रभावी ढंग से लागू हों।