शारदा नदी में कटान रोकने के उद्देश्य से बनाई गई ₹6.61 करोड़ की स्टड निर्माण परियोजना विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना पूरी होने के कुछ ही दिनों बाद इसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आसपास के गांवों में एक बार फिर बाढ़ और नदी कटान का खतरा बढ़ गया है। मामले में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कटान से बचाव के लिए स्वीकृत हुई थी परियोजना
मामला सीतापुर जिले की लहरपुर तहसील के बसंतापुर गांव का है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में शारदा नदी की कटान से करीब 600 मीटर भूमि नदी में समा गई थी। इसके बाद बसंतापुर समेत आसपास के गांवों को कटान से बचाने के लिए ₹6.61 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण परियोजना स्वीकृत की गई थी।
'निर्माण के कुछ ही दिनों बाद धंसा जियो ट्यूब'
ग्रामीणों का दावा है कि सिंचाई विभाग ने 3 अप्रैल 2026 को निर्माण कार्य शुरू कराया और 30 जून 2026 को इसे पूरा घोषित कर दिया। उनका आरोप है कि 20 जुलाई को स्टड संख्या-4 के पास लगाया गया जियो ट्यूब नदी में धंस गया, जिसके बाद परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया निर्माण कार्य कुछ ही दिनों में प्रभावित होने लगा, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर संदेह पैदा हुआ है।
कई गांवों पर फिर मंडराया कटान का खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टड के क्षतिग्रस्त होने के बाद शारदा नदी का बहाव प्रभावित हुआ है। उनका दावा है कि इससे बसंतापुर समेत आसपास के कई गांवों में दोबारा बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो नुकसान और बढ़ सकता है।
अधिकारियों के व्यवहार पर भी लगाए आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद 21 जुलाई को अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्होंने समस्याओं का समाधान करने के बजाय कथित तौर पर ग्रामीणों को डराने-धमकाने का प्रयास किया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र में परियोजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा, कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सिंचाई विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, परियोजना को लेकर लगाए गए आरोपों पर सिंचाई विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।