जिला अस्पताल में कथित अव्यवस्थाओं और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर मामला चर्चा में है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज पाठक ने आरोप लगाया है कि शिकायत किए जाने के सात महीने बाद भी संबंधित मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
डिप्टी सीएम को भेजा गया था शिकायत पत्र
मनोज पाठक के अनुसार, उन्होंने सात महीने पहले उपमुख्यमंत्री को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा था। शिकायत में जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, उपकरणों की उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
इन्क्यूबेटर नहीं होने का लगाया आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के उपचार के लिए आवश्यक लाइफ सपोर्ट सिस्टम इन्क्यूबेटर लंबे समय से उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि इस महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण के अभाव में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानांतरण और उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही पूरे मामले की राज्य स्तर पर निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई हो तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय पर शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार संभव हो सकता था।
विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित स्वास्थ्य विभाग या जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सवाल यह है कि क्या इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?