भले ही आज टेलीकॉम कंपनियां अपने रिचार्ज प्लान्स की कीमतें बढ़ा रही हों, लेकिन पिछले एक दशक में भारत में मोबाइल इंटरनेट पहले के मुकाबले बेहद सस्ता हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 के मुकाबले 2025 तक 1GB मोबाइल डेटा की कीमत में 97 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसी वजह से इंटरनेट देश के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचा है और करोड़ों लोग डिजिटल दुनिया से जुड़ पाए हैं।
न्यू इंडिया समाचार की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 में 1GB मोबाइल डेटा की औसत कीमत 308 रुपये थी। वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर सिर्फ 7.87 रुपये रह गई। डेटा की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट ने इंटरनेट को आम लोगों की पहुंच में ला दिया है, जिससे डिजिटल सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में देश में इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या करीब 25.5 करोड़ थी, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 105.9 करोड़ पहुंच गई। वहीं मोबाइल कनेक्शनों की संख्या भी 90 करोड़ से बढ़कर 127.3 करोड़ हो गई। यह आंकड़े दिखाते हैं कि देश में डिजिटल कनेक्टिविटी कितनी तेजी से बढ़ी है।
पीटीआई द्वारा देखे गए सरकारी दस्तावेज के अनुसार, 2014 में देश में लगभग 6 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे। यह संख्या 2025 तक बढ़कर करीब 100 करोड़ हो गई। इस तरह पिछले एक दशक में ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में लगभग 17 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट डेटा की कम कीमतों का सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों को हुआ है। सस्ते डेटा, स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता और बेहतर नेटवर्क कवरेज के कारण गांवों में भी इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है।
देश में दूरसंचार ढांचे के विस्तार का असर 5G नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 5G सेवाएं अब देश के 99.6 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 7.22 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ते इंटरनेट ने भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्थान दिलाया है।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, भारत का मोबाइल फोन निर्यात भी पिछले दशक में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। जहां 2014 में मोबाइल फोन निर्यात का मूल्य लगभग 1,600 करोड़ रुपये था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये हो गया।
दस्तावेज के मुताबिक, आधार नामांकन की संख्या 2014 के 61.01 करोड़ से बढ़कर 2025 तक 144 करोड़ से अधिक हो गई है। वहीं सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2014 में जहां किसी भी सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई को मंजूरी नहीं मिली थी, वहीं अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
पिछले 10 वर्षों में सस्ते इंटरनेट, बढ़ते मोबाइल नेटवर्क, 5G विस्तार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश ने भारत की डिजिटल तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। इंटरनेट अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के गांव-गांव तक पहुंच चुका है और करोड़ों लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है।