उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस बार ओबीसी आरक्षण की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 'ट्रिपल टेस्ट' के आधार पर ही तय की जाएगी।
'ट्रिपल टेस्ट का शत-प्रतिशत होगा पालन'
जिलों के दौरे पर निकले आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आयोग ट्रिपल टेस्ट के सभी मानकों का पूरी तरह पालन कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और भविष्य में इसे लेकर किसी प्रकार की कानूनी बाधा उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य ऐसा मजबूत और तथ्यात्मक आधार तैयार करना है, जिससे आरक्षण व्यवस्था न्यायिक कसौटी पर भी पूरी तरह खरी उतर सके।
प्रदेश में पहली बार गठित हुआ समर्पित आयोग
न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार इस प्रकार के समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन ही इस उद्देश्य से किया गया है कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी तथ्यों का निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जा सके।
75 जिलों का होगा व्यापक सर्वेक्षण
आयोग अध्यक्ष ने बताया कि अनुभवजन्य साक्ष्य (Empirical Data) जुटाने के लिए आयोग की टीम उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों का दौरा करेगी। यह टीम केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राम पंचायतों और ब्लॉक स्तर तक जाकर सामाजिक और जनसंख्या संबंधी आंकड़े एकत्र करेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल आयोग शुरुआती चरण में जिलों का दौरा कर रहा है और सभी जिलों से डेटा संग्रह के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सरकार तय करेगी चुनाव की समयसीमा
चुनाव की संभावित तारीख और आयोग की रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा को लेकर पूछे गए सवाल पर न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि आयोग का दायित्व केवल निष्पक्ष तरीके से डेटा एकत्र कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट जमा होने के बाद पंचायत और निकाय चुनाव कब कराए जाएंगे तथा चुनावी कार्यक्रम क्या होगा, इसका अंतिम निर्णय राज्य सरकार ही करेगी।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर दिया जोर
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जनता और राजनीतिक दलों की उत्सुकता स्वाभाविक है, लेकिन पूरे प्रदेश के 75 जिलों का विस्तृत अध्ययन करने में समय लगेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आयोग पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और गंभीरता के साथ अपना कार्य कर रहा है, ताकि आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या कानूनी अड़चन न आए।