अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की 9 पृष्ठों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। ट्रस्ट की बैठक के बाद यह रिपोर्ट मीडिया तक पहुंची, जिसमें दान राशि की गणना प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
गणना कक्ष में गबन के प्रथम दृष्टया मिले संकेत
SIT की रिपोर्ट के अनुसार, दान राशि की गणना के दौरान प्रथम दृष्टया गबन के संकेत मिले हैं। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि CCTV फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों को छिपाते और हटाते हुए दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका से जोड़कर देखा गया है।
27 अप्रैल से 5 जून तक की CCTV फुटेज की जांच
जांच टीम ने 27 अप्रैल से 5 जून तक की CCTV फुटेज का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, इससे पहले की घटनाओं का मूल्यांकन पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण नहीं किया जा सका।
सुरक्षा व्यवस्था और SOP पर उठे सवाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट और बैंक के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निर्धारित MoU और Standard Operating Procedure (SOP) का प्रभावी पालन नहीं हुआ। तलाशी, CCTV निगरानी और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह लागू नहीं किए गए, जिसे SIT ने गंभीर लापरवाही माना है।
छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई
प्रारंभिक जांच में छह लोगों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताई गई है। रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। SIT ने इनकी भूमिका की विस्तृत जांच की सिफारिश की है।
आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश
रिपोर्ट में संबंधित लोगों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है। साथ ही पर्यवेक्षण, जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली में गंभीर विफलता का भी उल्लेख किया गया है।
अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी की भूमिका पर सवाल
SIT ने रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित नहीं किया गया। इसके अलावा गणना प्रभारी की भूमिका, कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी
SIT ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट अलग से संबंधित प्राधिकरण को भेजी जाएगी, जिसमें आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत निष्कर्ष शामिल होंगे।