मिमोह चक्रवर्ती स्टारर फिल्म 'हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट' इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। हालांकि फिल्म की रिलीज तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। निर्देशक विक्रम भट्ट ने हाल ही में एक भावुक पोस्ट के जरिए उन चुनौतियों का खुलासा किया, जिनसे गुजरकर यह फिल्म दर्शकों तक पहुंच सकी।
शूटिंग शुरू हुई और 10 दिन में खत्म हो गया पैसा
विक्रम भट्ट ने बताया कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने के महज 10 दिन बाद ही फंडिंग का संकट खड़ा हो गया था। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई थी कि पूरी टीम को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़े। उन्होंने कहा, "शूटिंग शुरू होने के दस दिन बाद ही पैसे खत्म हो गए थे। ज्यादातर फिल्में ऐसे हालात में रुक जाती हैं, लेकिन हमने हार नहीं मानी। ब्याज पर पैसा उधार लिया, वेंडर्स से बातचीत की और किसी तरह शूटिंग जारी रखी।"
पोस्ट-प्रोडक्शन और वीएफएक्स ने बढ़ाईं मुश्किलें
फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद भी चुनौतियां खत्म नहीं हुईं। पोस्ट-प्रोडक्शन और वीएफएक्स का काम लगातार अड़चनों का सामना कर रहा था। इसी दौरान विक्रम भट्ट की निजी जिंदगी में ऐसा तूफान आया जिसने पूरे प्रोजेक्ट को लगभग रोक दिया।
गिरफ्तारी और 75 दिन जेल में बिताने का खुलासा
विक्रम भट्ट ने बताया कि उन पर और उनकी पत्नी पर कुछ आरोप लगाए गए, जिन्हें वह आज भी गलत मानते हैं। इन आरोपों के चलते दोनों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें 75 दिन जेल में बिताने पड़े। उन्होंने कहा, "जिंदगी ने सबसे बड़ा झटका तब दिया जब मुझे और मेरी पत्नी को गिरफ्तार किया गया। मैंने 75 दिन जेल में बिताए और इस दौरान 'हॉन्टेड' अधूरी रह गई।"
आनंद पंडित ने नहीं छोड़ा साथ
जेल में रहते हुए विक्रम भट्ट को लगने लगा था कि फिल्म उनके बिना ही रिलीज कर दी जानी चाहिए। उन्होंने इस बारे में निर्माताओं से भी बात की थी। हालांकि निर्माता आनंद पंडित का जवाब उनके लिए बड़ी प्रेरणा बना। विक्रम के मुताबिक, आनंद पंडित ने साफ कहा, "विक्रम भट्ट के बिना यह फिल्म रिलीज नहीं होगी।"
जेल से लौटे तो ठप पड़ा था पोस्ट-प्रोडक्शन
जेल से बाहर आने के बाद विक्रम भट्ट को पता चला कि फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन लगभग रुक चुका है। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत की। उन्होंने बताया कि कई दिनों तक 18 से 20 घंटे काम कर फिल्म को पूरा किया गया। उनका लक्ष्य सिर्फ इतना था कि यह प्रोजेक्ट किसी भी कीमत पर अधूरा न रह जाए।
रिलीज से दो दिन पहले खड़ी हो गई कानूनी बाधा
जब फिल्म रिलीज के बिल्कुल करीब थी, तभी एक नई कानूनी चुनौती सामने आ गई। फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की कोशिश की गई, जिससे पूरी टीम की चिंता बढ़ गई। विक्रम भट्ट ने कहा कि रिलीज से दो दिन पहले तक किसी को नहीं पता था कि फिल्म सिनेमाघरों में पहुंच पाएगी या नहीं। वितरकों और प्रदर्शकों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल था।
सीमित रिलीज के बावजूद दर्शकों ने दिया साथ
आखिरकार फिल्म को रिलीज की मंजूरी मिल गई, लेकिन कानूनी अनिश्चितताओं के कारण इसका प्रदर्शन सीमित रहा। इसके बावजूद दर्शकों का सकारात्मक रिस्पॉन्स फिल्म के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। विक्रम भट्ट ने कहा, "हर मायने में इस फिल्म को असफल होना चाहिए था, लेकिन दर्शकों ने इसे स्वीकार किया। अंत में मेरी सिर्फ यही इच्छा थी कि लोग 'हॉन्टेड' देखें।"
साइंस और टेक्नोलॉजी से मिलता है क्रिएटिविटी का आधार
अपने इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने बताया कि उन्हें विज्ञान और तकनीक से जुड़ी नई जानकारियां पढ़ना बेहद पसंद है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक को समझना आज के दौर में बेहद जरूरी है और यही चीज उनकी कहानियों को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और नई खोजें उनकी रचनात्मक प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं।
फॉर्मूला 1 के बड़े फैन हैं विक्रम भट्ट
विक्रम भट्ट ने अपने पसंदीदा खेल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह फॉर्मूला 1 रेसिंग के बड़े प्रशंसक हैं और लगभग हर सीजन को फॉलो करते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आईपीएल और क्रिकेट में उनकी खास रुचि नहीं है और कई खिलाड़ियों के नाम तक उन्हें नहीं पता।
'डर' को मानते हैं हर भावना की जड़
हॉरर फिल्मों के लिए मशहूर विक्रम भट्ट का मानना है कि डर इंसानी भावनाओं की सबसे मूलभूत वजह है। उनके अनुसार, किसी प्रियजन को खोने का डर अधिकार की भावना पैदा करता है, संसाधनों की कमी का डर लालच को जन्म देता है और अकेले पड़ जाने का डर लोगों को रिश्ते बनाने के लिए प्रेरित करता है।
'पूरी दुनिया डर के सिद्धांत पर चलती है'
विक्रम भट्ट का कहना है कि अगर गहराई से देखा जाए तो अधिकांश भावनाओं के पीछे किसी न किसी रूप में डर मौजूद होता है। उन्होंने कहा, "सिर्फ इंसानों की दुनिया ही नहीं, बल्कि पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है। डर हमें खतरे से बचाता है और जिंदा रहने के लिए जरूरी है।"