80वें स्वतंत्रता दिवस के दिन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेन अल्फा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब Gen-Z के बाद Gen-Alpha भी अपने हक और स्कूलों की बुरी हालत को लेकर अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। वो अपने स्कूलों की बेसिक ज़रूरतों और सुविधाओं को लेकर डिमांड कर रहे हैं। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस बार 15 अगस्त खास है। देश के कई हिस्सों में बच्चे अपने स्कूलों की हालत सुधारने की मांग कर रहे हैं। वो स्कूलों में बैठने के लिए अच्छी सुविधा, साफ पानी, अच्छे शौचालय और कहीं-कहीं शिक्षकों को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
अब बच्चे भी अपने हक के लिए उठा रहे आवाज
केजरीवाल ने कहा कि अब बच्चे अपने अधिकारों को समझने लगे हैं और उनके लिए आवाज भी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना ही आजादी की एक बड़ी निशानी है। उन्होंने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर, देहरादून और राजस्थान के बाड़मेर का उदाहरण देते हुए केजरीवाल बोले कि इन जगहों पर छात्र अच्छी सड़क और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी अगर बच्चों को स्कूलों में जरूरी चीज़ों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है, तो यह सरकार पर बड़ा सवाल है।
कौन होते हैं Gen-Z और Gen-Alpha?
1997 से 2012 के बीच में पैदा हुए लोगों को Gen-Z कहा जाता है। इसके बाद जन्मी जनरेशन को Gen-Alpha कहा जाता है। Gen-Alpha वो जनरेशन है जो बचपन से ही मोबाइल और इंटरनेट के बीच बड़ी हो रही है। आज इस जनरेशन के कई बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं और अपनी पढ़ाई और स्कूलों से जुड़ी जरूरतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।