बिहार के स्वास्थ्य विभाग में लगाए गए डस्टबिन की कीमत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की खरीद प्रक्रिया को लेकर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर भी राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिन डस्टबिन की बाजार में सामान्य कीमत बताई जा रही है, उन्हें विभागीय रिकॉर्ड में काफी अधिक कीमत पर दिखाया गया।
बाजार कीमत और विभागीय दर में अंतर का आरोप
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल डस्टबिन की खरीद कीमत को लेकर उठ रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि बाजार में सामान्य कीमत वाले डस्टबिन स्वास्थ्य विभाग में कथित तौर पर महंगे दाम पर खरीदे गए।
आखिर इतनी ज्यादा कीमत क्यों?
इस मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि डस्टबिन की कीमत इतनी अधिक कैसे तय हुई। क्या खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या फिर कीमत तय करने में किसी तरह की गड़बड़ी हुई?
खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग
विवाद सामने आने के बाद अब खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पूरे मामले में दस्तावेजों और भुगतान से जुड़ी जानकारी की जांच किए जाने की मांग की जा रही है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
बिहार की सियासत में तेज हुई चर्चा
डस्टबिन की कीमत का मामला सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष और राजनीतिक दलों की ओर से मामले को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल डस्टबिन की खरीद में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग या जांच एजेंसी इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और खरीद प्रक्रिया को लेकर वास्तविक तथ्य क्या सामने आते हैं।