इन दिनों हमारे देश में एथेनॉल को लेकर हर तरफ बवाल मचा हुआ है। जनता से लेकर संसद तक E20 फ्यूल पर चर्चा हो रही है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदूषण कम होगा और बाहर से कच्चा तेल मंगाने का भारी-भरकम खर्च बचेगा। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से इस E20 पेट्रोल को लेकर ऑटो इंडस्ट्री में एक अजीब सी हलचल देखने को मिल रही है। भारत की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा अंदर ही अंदर फ्यूल की क्वालिटी को लेकर काफी परेशान नजर आ रही हैं।
क्यों डर रही हैं कंपनियां?
रिपोर्ट के मुताबिक इन दिग्गज कंपनियों के बड़े अफसरों के बीच ईमेल्स में हुई बातचीत से यह राज खुला हैं। एक तरफ जहां ये कंपनियां मिलकर सरकार की इस पहल का समर्थन कर रही हैं। वहीं निजी तौर पर इन्हें डर सता रहा है कि पंपों पर मिलने वाले E20 फ्यूल में मिलावट गाड़ियों को नुकसान पहुंचा रही हैं। आपको बता दें, लीक हुए ईमेल्स से पता चलता है कि ऑटो कंपनियों ने देशभर के 21 राज्यों के करीब 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल के सैंपल इकट्ठे किए थे। जब इनकी लैब में जांच हुई तो नतीजे चौंकाने वाले निकले। लगभग 18 राज्यों से लिए गए सैंपल्स में क्लोराइड और नमी का स्तर सरकारी तय स्टैंडर्ड्स से कई गुना ज्यादा पाया गया।
सरकार के हिसाब से पेट्रोल में क्लोराइड 3 ppm से ज्यादा नहीं होना चाहिए। वहीं दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह आंकड़ा 300 से 570 ppm तक मिला। इतनी ज्यादा मात्रा में क्लोराइड का होना गाड़ियों के लिए किसी जहर से कम नहीं है। मारुति और महिंद्रा के एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्यूल इंजेक्टर 1 ppm से ज्यादा क्लोराइड सहन नहीं कर सकते। अगर पेट्रोल में ऑर्गेनिक क्लोराइड ज्यादा हो तो महज 200 किलोमीटर गाड़ी चलाने के बाद ही उसका इंजन बंद सकता है। वहीं, पेट्रोल में नमी होने से गाड़ी में जंग लगने और फ्यूल लाइन जाम होने का खतरा तुरंत बढ़ जाता है।
क्या सब दावे सही हैं?
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सबसे दिलचस्प बात यह है कि कंपनियों का बर्ताव बाहर से अलग, अंदर से बिल्कुल अलग महसूस होता है। SIAM यानी देश की ऑटोमोबाइल संस्था ने जुलाई के आखिर में सरकार को एक फॉर्मल लेटर भेजा था। इस लेटर में E20 पेट्रोल में क्लोराइड के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता जताई गई थी, लेकिन लेटर भेजने के हफ्ते भर बाद ही जब सरकार ने E20 को पूरी तरह सुरक्षित बताया तो SIAM ने अपना वह कंप्लेंट लेटर वापिस ले लिया और कहा कि आंकड़ों की दोबारा जांच की जरूरत है। लीक हुए ईमेल्स बताते हैं कि कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स आपस में इन आंकड़ों को लेकर पूरी तरह कॉन्फिडेंट था। महिंद्रा और मारुति के अधिकारियों ने ईमेल में साफ लिखा था कि पेट्रोल डलवाने के तुरंत बाद गाड़ियों में जो ब्रेकडाउन आ रहे हैं, उसके पीछे यही जहरीला क्लोराइड जिम्मेदार है। आम जनता के सामने कंपनियां सबकुछ ठीक बता रही हैं, लेकिन बैकस्टेज में उनकी टेंशन साफ दिखाई दे रही है।
सरकार का इस पर क्या है रिएक्शन?
विवाद बढ़ने के बाद महिंद्रा ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश की है। कंपनी का कहना है कि ईमेल्स के आधार पर जो निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं उसके मुताबिक रिपोर्ट में बातें गलत तरीके से दर्शाई जा रही हैं। दूसरी तरफ मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स ने इस लीक रिपोर्ट पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है और कोई ऑफिसियल स्टेटमेंट देने से परहेज किया हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार का रुख एकदम साफ है। पेट्रोलियम मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय का मानना है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह से सुरक्षित है। सरकार का यह भी कहना है कि उनके बड़े पैमाने पर किए गए ट्रायल में इंजन के घिसने या खराब होने की कोई बात सामने नहीं आई है। अगर कहीं खराबी है भी तो वह पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड टैंकों की ठीक से सफाई न होने या पाइपलाइन के देखभाल करने में लापरवाही हो सकती हैं।