आज के समय में बच्चों का मोबाइल, लैपटॉप और टीवी में पूरा दिन बिजी रहना आम बात है। अगर बच्चा किताबों से दूर भागता है और हर वक्त स्क्रीन देखता रहता है, तो माता-पिता चिंतित हो जाते हैं। पढ़ने की आदत बच्चे की भाषा, सोच और समझ को बढ़ाती है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे पर दबाव डालने के बजाय धीरे-धीरे उसकी रुचि किताबों में बढ़ाएं।
बच्चे की पसंद से करें शुरुआत
हर बच्चे की पसंद अलग होती है। किसी बच्चे को कॉमिक्स पसंद होती हैं, तो किसी को कहानियां, सुपरहीरो, परियों या एडवेंचर से जुड़ी किताबें अच्छी लगती हैं। इसलिए शुरुआत ऐसी किताब से करें जो बच्चे को पसंद आए और पढ़ने मे भी सरल हों क्योंकि जरूरी नहीं कि पहली किताब बड़ी या मुश्किल हो। छोटी और आसान कहानी से शुरुआत करने पर बच्चा पढ़ने में ज्यादा रुचि दिखाता है। बच्चे को किताब पढ़ने के लिए डांटना या मजबूर करना भी टाले। इससे उसके मन में किताबों को लेकर डर कम होगा। इसके बजाय रोज 10-15 मिनट का समय पढ़ने के लिए तय करें और इस दौरान उसके साथ बैठें। जब बच्चा खुद पढ़ने लगे तो उसकी तारीफ करें। धीरे-धीरे यह समय उसकी रोज की आदत बन सकता है।
बनें बच्चे का रीडिंग रोल मॉडल
बच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर में बड़े लोग खाली समय मोबाइल पर बिताएंगे, तो बच्चे को किताब पढ़ने के लिए बढ़ावा देना मुश्किल होगा। कोशिश करें कि दिन में कुछ समय निकालकर परिवार के साथ बैठें और किताब पढ़ें और उसके बाद कहानी के बारे में बात भी करें। उससे पूछें कि उसे कौन-सा किरदार अच्छा लगा या कहानी में क्या मजेदार लगा। इससे पढ़ना उसके लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं रहेगा, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने की एक अच्छी एक्टिविटी बन जाएगा।
स्क्रीन टाइम को धीरे-धीरे करें कम
मोबाइल, टीवी और लैपटॉप को अचानक पूरी तरह बंद करना सही नहीं होगा, इसलिए स्क्रीन टाइम के लिए एक तय समय रखें और बच्चे को पहले से इसकी जानकारी दें। बाकी समय में उसे किताब, खेल, ड्रॉइंग या दूसरी पसंदीदा एक्टिविटीज में शामिल करें। किताबों को केवल पढ़ाई से न जोड़ें, बल्कि उन्हें मनोरंजन और नई चीजें सीखने का जरिया बनाएं।