सावन के पवित्र महीने में जहां कांवड़ यात्रा के दौरान 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं इस बार कांवड़ यात्रा में एक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी चर्चा में है। बुलंदशहर और पिलखुवा क्षेत्र के शिवभक्त कांवड़ियों का एक दल हरिद्वार से 'आरक्षण खत्म करो' संदेश वाली विशेष कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है।
'आरक्षण खत्म करो' संदेश वाली कांवड़
इस अनोखी कांवड़ पर आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने और समानता की मांग से जुड़े बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। कांवड़ के मार्ग में पहुंचते ही इसे देखने और तस्वीरें लेने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। शिविरों और कांवड़ मार्गों पर इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच चर्चा भी हो रही है।
पिलखुवा के शिवभक्त ने बताई मांग
पिलखुवा के ग्राम खेड़ा निवासी शिवभक्त विशाल शर्मा ने कहा कि वे भगवान भोलेनाथ का जल लेकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनके मुताबिक, जातिगत आरक्षण व्यवस्था को खत्म कर योग्यता और आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के योग्य युवाओं को कई बार पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
मांग नहीं मानी तो जंतर-मंतर जाने की चेतावनी
विशाल शर्मा ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो कांवड़ यात्रा के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने देशभर के युवाओं से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील भी की।
कांवड़ मार्ग पर लोगों में चर्चा
हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास के शिविरों में जब यह कांवड़ पहुंची तो बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचे। कांवड़ पर लगाए गए पोस्टर और संदेश लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। इस दौरान कुछ युवाओं ने कांवड़ियों की मांग का समर्थन भी किया।
'लाखों युवाओं की आवाज' होने का दावा
कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों का कहना है कि उनका विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं है। उनका दावा है कि यह देश के उन युवाओं की आवाज है जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर असंतुष्ट हैं और व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।
कांवड़ यात्रा के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी?
कांवड़ियों ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो यात्रा समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जा सकता है। फिलहाल, 'आरक्षण विरोधी कांवड़' कांवड़ यात्रा के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।