अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। ‘शक्तिमान’ फेम अभिनेता ने राष्ट्रगान को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा है कि ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत का आधिकारिक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ ही है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज में भी इसे भारत का राष्ट्रगान बताया गया है, जबकि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है।
'जन गण मन' को लेकर मुकेश खन्ना ने उठाए सवाल
IANS को दिए इंटरव्यू में मुकेश खन्ना ने ‘जन गण मन’ को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि यह गीत तत्कालीन ब्रिटिश शासक से जुड़ा था और इसे बाद में भारत ने राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। मुकेश खन्ना ने अपने बयान में ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की इच्छा जताई।
'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की मांग
मुकेश खन्ना का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई और राष्ट्रीय भावना से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे राष्ट्रगान का दर्जा दिए जाने की वकालत की। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का करीब सात मिनट का संस्करण रिकॉर्ड किया है और वह चाहते हैं कि इसे बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाए।
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत में क्या अंतर है?
भारत सरकार के अनुसार ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है। इसके पहले पद को आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है। वहीं ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है। गृह मंत्रालय के दस्तावेजों में दोनों के लिए अलग-अलग आधिकारिक निर्देश मौजूद हैं।
'वंदे मातरम' का स्वतंत्रता आंदोलन में रहा अहम योगदान
‘वंदे मातरम’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक महत्व रहा है। सरकार के एक आधिकारिक जवाब में भी कहा गया है कि संविधान सभा के अध्यक्ष ने 24 जनवरी 1950 को इसके स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान दिए जाने की बात कही थी।
मुकेश खन्ना के बयान पर अब चर्चा तेज
मुकेश खन्ना के इस बयान के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। हालांकि, ‘जन गण मन’ को हटाकर ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। मौजूदा व्यवस्था में ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है।