नोखा प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई विभाग की ओर से अंग्रेजों के समय बनाए गए कई पुल-पुलिया वर्षों से जर्जर हालत में हैं। हादसे की आशंका को देखते हुए विभाग ने कई पुलों पर एंगल लगाकर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया है। इससे बक्सर कैनाल और चौसा कैनाल से जुड़े दर्जनों गांवों के ग्रामीणों और किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
किसानों को कई किलोमीटर का लगाना पड़ रहा चक्कर
पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से किसानों को अपने कृषि उत्पाद, हार्वेस्टर और अन्य वाहन लेकर वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ रहा है। अतिरिक्त दूरी तय करने से किसानों का समय और डीजल खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
मणिपुर गांव का पुल पांच साल से इंतजार में
मणिपुर गांव के पास बना पुल नोखा के अलावा डेहरी और राजपुर प्रखंड के कई गांवों को जोड़ता है। लीलारी, यारी, भाव पोखर और माझिया होते हुए यह रास्ता राजपुर प्रखंड के रोटवां समेत कई गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब पांच वर्ष पहले पुल की हालत खराब होने पर उन्होंने आपस में चंदा जुटाकर इसकी मरम्मत कराई थी। इसके बावजूद अब तक पुल के स्थायी निर्माण या जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
विभाग के पास फंड नहीं, जिम्मेदारी को लेकर भी पेच
ग्रामीणों का कहना है कि बड़े वाहनों पर रोक का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुल निर्माण के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण निर्माण का मामला लंबे समय से अटका हुआ है।
चौसा कैनाल के पुलों की हालत भी खराब
चौसा कैनाल पर जख्मी पुल से बड़का गांव, धारूपुर और रामपुर समेत कई गांव जुड़े हैं। यह पुल भी जर्जर हालत में है। इसके अलावा कृष्णापुर गांव के पास स्थित पुल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर रहे किसान
कृष्णापुर का पुल भरांव-दिनारा पथ से नोखा प्रखंड मुख्यालय को जोड़ता है। हादसे की आशंका के चलते यहां भी एंगल लगाकर बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। पुल बंद होने से किसानों को भरांव-दिनारा पथ के रास्ते दूसरे मार्ग से जाना पड़ रहा है, जिससे करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से जर्जर पुलों का तकनीकी सर्वे कराने और जल्द स्थायी निर्माण या जीर्णोद्धार कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल एंगल लगाकर पुल बंद कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। समय रहते पुलों की मरम्मत या निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहेगा।