सोशल मीडिया पर बलिया के दिघेड़ा की 7 साल की रागिनी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक पैर के सहारे कूदते हुए स्कूल जाती नजर आ रही है। रागिनी की कहानी बताती है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी इंसान के कदम नहीं रोक सकती। जब रागिनी महज 6 महीने की थी, तभी एक हादसे में उसने अपना एक पैर खो दिया था। हादसे के बाद इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल हो गया और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज पूरा नहीं हो सका। इसके बावजूद रागिनी ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल जाने का सिलसिला बनाए रखा।
मुश्किल रास्ते, लेकिन पढ़ाई का जुनून बरकरार
रोजाना स्कूल जाने का सफर रागिनी के लिए आसान नहीं है। एक पैर के सहारे उसे स्कूल तक पहुंचने के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रास्ते की दिक्कतें और शारीरिक चुनौतियां उसके सामने जरूर आती हैं, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका जुनून उसे आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। रागिनी का सपना बड़ा होकर डॉक्टर बनने का है। वह पढ़-लिखकर अपने सपनों को पूरा करना चाहती है और अपनी परिस्थितियों को अपनी मंजिल के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहती।
रागिनी जब 6 महीने की थी, तब एक्सीडेंट में उसका एक पैर टूट गया था। अब 7 साल की हो गई है। घर से 400 मीटर दूर स्कूल है। वह एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाती है। यह बिटिया हार नहीं मानेगी।
📍जिला बलिया, उत्तर प्रदेश pic.twitter.com/Ldx3noOo67
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 1, 2026
परिवार को मदद की उम्मीद
रागिनी को स्कूल आने-जाने के लिए ट्राईसाइकिल की जरूरत है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण उसके परिजन खुद इसकी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। ट्राईसाइकिल मिलने से रागिनी के लिए स्कूल तक पहुंचना काफी आसान हो सकता है और वह बिना ज्यादा परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। अब परिवार को प्रशासन और संबंधित विभाग से उम्मीद है कि रागिनी की जरूरत को समझते हुए उसकी मदद के लिए आगे आया जाएगा।
रागिनी के सपनों को चाहिए समाज और प्रशासन का साथ
रागिनी की कहानी उन बच्चों के लिए भी प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। महज 7 साल की उम्र में एक पैर खोने के बावजूद रागिनी ने पढ़ाई के प्रति अपना हौसला नहीं खोया। अब जरूरत है कि उसके इस जज्बे को समाज और प्रशासन का साथ मिले। रागिनी के लिए एक ट्राईसाइकिल सिर्फ स्कूल तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि उसके डॉक्टर बनने के सपने की राह को आसान करने वाला सहारा बन सकती है।