तिब्बत के इलाके में एक औऱ झील के फटने से नेपाल के सामने दूसरी बार आफत खड़ी हो गई है। नेपाल पुलिस औऱ सेना ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों, बचाव दल औऱ स्थानीय लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए हैं। 

रोका गया राहत-बचाव कार्य

चीन के सरकारी मीडिया सीसीटीवी ने बताया है कि झील का पानी ओवरफ्लो कर रहा है। इसके बाद भोटेकाशी औऱ त्रिशूली नदियों में जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह सै तटीय इलाकों में जल प्रलय की आशंका बढ़ गई है। खतरे की वजह से रसुवा में बचाव कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। नेपाल ने लेवल 4 का अलर्ट जारी कर लोगों को खतरे की चेतावनी दी है। 

26 अगस्त को जलप्रलय का तांडव

इससे पहले भूस्खलन से आई बाढ़ ने दोनों देशों में 450 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और 1500 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय भी शामिल है। इशके अलावा कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं का एक 77 सदस्य़ीय दल भी लापता बताया जा रहा है।

दरअसल पहली बार 26 अगस्त को भूस्खलन से आए फ्लेश फ्लड से तिब्बत के चोचेन नदी औऱ पुरेपु त्सांगपो संगम पर बर्फ, चट्टान मिट्टी और मलबे से बैरियर लेक यानि एक कृत्रिम झील बन गई थी। इस झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर पानी इकट्ठा हो गया है, इसे ऐसे समझा जा सकता है कि इतना पानी इकट्ठा करने के लिए 1200 से ज्यादा ओलंपिक ग्राउंड्स की ज़रूरत होती है। लेकिन कम जगह होने से यह फट गई है और इसके पानी ने दोनों भोटेकाशी औऱ त्रिशूली नदी में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है।  अभ ये पानी स्याब्रुबेसी तक पहुंच गया है।

राहत की खबर

इस बीच भारत औऱ नेपाल के लिए राहत की बात यह है कि  त्रिशूली हाइड्रोपॉवर टनल की साइट से 350 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जिसमें कई भारतीय शामिल हैं। वहीं नेपाल के लिए दुनिया भर के देश मदद के लिए आगे आ रहे हैं। यूनाइटेड अरब अमीरात ने नेपाल को राहत-बचाव कार्य के लिए एक करोड़ डॉलर की आपातकालीन राहत राशि देने का ऐलान किया है।